ग़ज़ल 28

शेर 25

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई था अगर

फिर ये हंगामा मुलाक़ात से पहले क्या था

मैं उम्र को तो मुझे उम्र खींचती है उलट

तज़ाद सम्त का है अस्प और सवार के बीच

धूप जवानी का याराना अपनी जगह

थक जाता है जिस्म तो साया माँगता है

नतीजा एक सा निकला दिमाग़ और दिल का

कि दोनों हार गए इम्तिहाँ में दुनिया के

अजीब शख़्स था मैं भी भुला नहीं पाया

किया उस ने भी इंकार याद आने से

पुस्तकें 2

Dhundli Tasveer

 

1993

गुमाँ आबाद

 

2013

 

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