Zia Jalandhari's Photo'

अग्रणी आधुनिक पाकिस्तानी शायरों में विख्यात।

अग्रणी आधुनिक पाकिस्तानी शायरों में विख्यात।

ग़ज़ल 37

शेर 25

बुरा मान 'ज़िया' उस की साफ़-गोई का

जो दर्द-मंद भी है और बे-अदब भी नहीं

हिम्मत है तो बुलंद कर आवाज़ का अलम

चुप बैठने से हल नहीं होने का मसअला

इश्क़ में भी कोई अंजाम हुआ करता है

इश्क़ में याद है आग़ाज़ ही आग़ाज़ मुझे

in love's journey do you think you'll ever reach your goal?

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पुस्तकें 4

दम-ए-सुब्ह

 

2003

Kulliyat-e-Ziya

 

2007

Sar-e-Sham

 

1968

ज़िया जालन्धरी:शख़्सियत और फ़न

 

 

 

वीडियो 6

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

ज़िया जालंधरी

आँखों में निहाँ है जो मुनाजात वो तुम हो

ज़िया जालंधरी

तुम्हारी चाहत की चाँदनी से हर इक शब-ए-ग़म सँवर गई है

ज़िया जालंधरी

मुंजमिद होंटों पे है यख़ की तरह हर्फ़-ए-जुनूँ

ज़िया जालंधरी

शहर-ए-आशोब

वही सदा जो मिरे ख़ूँ में सरसराती थी ज़िया जालंधरी

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