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क़ाबिल अजमेरी

1931 - 1962

ग़ज़ल 21

शेर 30

वक़्त करता है परवरिश बरसों

हादिसा एक दम नहीं होता

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रास्ता है कि कटता जाता है

फ़ासला है कि कम नहीं होता

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तुम मानो मगर हक़ीक़त है

इश्क़ इंसान की ज़रूरत है

वीडियो 17

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ऑडियो 10

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तुम न मानो मगर हक़ीक़त है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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