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ज़फ़र इक़बाल

1933 - | ओकाड़ा, पाकिस्तान

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/नई दिशा देने वाले शायर

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/नई दिशा देने वाले शायर

ग़ज़ल 132

शेर 149

फिर सर-ए-सुब्ह किसी दर्द के दर वा करने

धान के खेत से इक मौज-ए-हवा आई है

वो क़हर था कि रात का पत्थर पिघल पड़ा

क्या आतिशीं गुलाब खिला आसमान पर

वो मक़ामात-ए-मुक़द्दस वो तिरे गुम्बद क़ौस

और मिरा ऐसे निशानात का ज़ाएर होना

ई-पुस्तक 7

Aab-e-Rawan

 

1978

अब तक-कुल्लियात-ए-ग़ज़ल

खण्ड-003

2006

अब तक-कुल्लियात-ए-ग़ज़ल

खण्ड-002

2005

अब तक-कुल्लियात-ए-ग़ज़ल

खण्ड-004

2012

अब तक-कुल्लियात-ए-ग़ज़ल

खण्ड-001

2004

Ghubar Aalood Simton Ka Suragh

 

1988

हे हनूमान

 

1997

 

चित्र शायरी 6

अगर इस खेल में अब वो भी शामिल होने वाला है तो अपना काम पहले से भी मुश्किल होने वाला है हवा शाख़ों में रुकने और उलझने को है इस लम्हे गुज़रते बादलों में चाँद हाइल होने वाला है असर अब और क्या होना था उस जान-ए-तग़ाफ़ुल पर जो पहले बेश ओ कम था वो भी ज़ाइल होने वाला है ज़ियादा नाज़ अब क्या कीजिए जोश-ए-जवानी पर कि ये तूफ़ाँ भी रफ़्ता रफ़्ता साहिल होने वाला है हमीं से कोई कोशिश हो न पाई कारगर वर्ना हर इक नाक़िस यहाँ का पीर-ए-कामिल होने वाला है हक़ीक़त में बहुत कुछ खोने वाले हैं ये सादा-दिल जो ये समझे हुए हैं उन को हासिल होने वाला है हमारे हाल-मस्तों को ख़बर होने से पहले ही यहाँ पर और ही कुछ रंग-ए-महफ़िल होने वाला है चलो इस मरहले पर ही कोई तदबीर कर देखो वगर्ना शहर में पानी तो दाख़िल होने वाला है 'ज़फ़र' कुछ और ही अब शो'बदा दिखलाइए वर्ना ये दावा-ए-सुख़न-दानी तो बातिल होने वाला है

 

वीडियो 7

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Gila Jo Hai Toh Khud Apne Hi Roz-o-Shab Sey Hai

ज़फ़र इक़बाल

इल्ज़ाम एक ये भी उठा लेना चाहिए

ज़फ़र इक़बाल

जो नारवा था इस को रवा करने आया हूँ

ज़फ़र इक़बाल

मैं ने कब दावा किया था सर-ब-सर बाक़ी हूँ मैं

ज़फ़र इक़बाल

ऑडियो 15

ख़ामुशी अच्छी नहीं इंकार होना चाहिए

लर्ज़िश-ए-पर्दा-ए-इज़हार का मतलब क्या है

अभी आँखें खुली हैं और क्या क्या देखने को

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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