Anand Narayan Mulla's Photo'

आनंद नारायण मुल्ला

1901 - 1997 | इलाहाबाद, भारत

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज थे। लोक सभा के सदस्य भी रहे

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज थे। लोक सभा के सदस्य भी रहे

ग़ज़ल 58

नज़्म 3

 

शेर 37

रोने वाले तुझे रोने का सलीक़ा ही नहीं

अश्क पीने के लिए हैं कि बहाने के लिए

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वो कौन हैं जिन्हें तौबा की मिल गई फ़ुर्सत

हमें गुनाह भी करने को ज़िंदगी कम है

who are those that seem to find the time for to repent

for us this life is too short to sin to heart's content

who are those that seem to find the time for to repent

for us this life is too short to sin to heart's content

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अब और इस के सिवा चाहते हो क्या 'मुल्ला'

ये कम है उस ने तुम्हें मुस्कुरा के देख लिया

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ई-पुस्तक 18

Aanand Naraayen Mulla

 

1960

Anand Narain Mulla: Shair Aur Danishwar

 

1995

जादा-ए-मुल्ला

 

1988

Joo-e-Sheer

 

1949

करब-ए-अागही

 

1977

Kuchh Nasr Mein Bhi

 

 

Kuchh Nasr Mein Bhi

 

1975

Kuchh Zarre Kuchh Tare

 

1959

कुछ ज़र्रे कुछ तारे

 

1989

कुल्लियात-ए-आनन्द नारायण मुल्ला

 

2010

चित्र शायरी 1

भूले से भी लब पर सुख़न अपना नहीं आता हाँ हाँ मुझे दुनिया में पनपना नहीं आता दिल को सर-ए-उल्फ़त भी है रुस्वाई का डर भी उस को अभी इस आँच में तपना नहीं आता ये अश्क-ए-मुसलसल हैं महज़ अश्क-ए-मुसलसल हाँ नाम तुम्हारा मुझे जपना नहीं आता तुम अपने कलेजे पे ज़रा हाथ तो रक्खो क्यूँ अब भी कहोगे कि तड़पना नहीं आता मय-ख़ाने में कुछ पी चुके कुछ जाम-ब-कफ़ हैं साग़र नहीं आता है तो अपना नहीं आता ज़ाहिद से ख़ताओं में तो निकलूँगा न कुछ कम हाँ मुझ को ख़ताओं पे पनपना नहीं आता भूले थे उन्हीं के लिए दुनिया को कभी हम अब याद जिन्हें नाम भी अपना नहीं आता दुख जाता है जब दिल तो उबल पड़ते हैं आँसू 'मुल्ला' को दिखाने का तड़पना नहीं आता

 

वीडियो 3

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ऑडियो 7

क़हर की क्यूँ निगाह है प्यारे

ख़मोशी साज़ होती जा रही है

ज़िंदगी गो कुश्ता-ए-आलाम है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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