Abdul Hamid's Photo'

अब्दुल हमीद

1953 | इलाहाबाद, भारत

ग़ज़ल 12

शेर 12

लौट गए सब सोच के घर में कोई नहीं है

और ये हम कि अंधेरा कर के बैठ गए हैं

दिन गुज़रते हैं गुज़रते ही चले जाते हैं

एक लम्हा जो किसी तरह गुज़रता ही नहीं

ये क़ैद है तो रिहाई भी अब ज़रूरी है

किसी भी सम्त कोई रास्ता मिले तो सही

ऑडियो 12

अभी साज़-ए-दिल में तराने बहुत हैं

अजीब शय है कि सूरत बदलती जाती है

उसे देख कर अपना महबूब प्यारा बहुत याद आया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

"इलाहाबाद" के और शायर

  • फ़र्रुख़ जाफ़री फ़र्रुख़ जाफ़री
  • अतीक़ इलाहाबादी अतीक़ इलाहाबादी
  • सालेह नदीम सालेह नदीम
  • एहतराम इस्लाम एहतराम इस्लाम
  • साहिल अहमद साहिल अहमद
  • अजमल अजमली अजमल अजमली
  • अफ़सर इलाहाबादी अफ़सर इलाहाबादी
  • हैरत इलाहाबादी हैरत इलाहाबादी
  • ख़्वाजा जावेद अख़्तर ख़्वाजा जावेद अख़्तर
  • शबनम नक़वी शबनम नक़वी