Abdul Hamid's Photo'

अब्दुल हमीद

1953 | इलाहाबाद, भारत

ग़ज़ल

अजीब शय है कि सूरत बदलती जाती है

अब्दुल हमीद

उसे देख कर अपना महबूब प्यारा बहुत याद आया

अब्दुल हमीद

एक ख़ुदा पर तकिया कर के बैठ गए हैं

अब्दुल हमीद

एक मिश्अल थी बुझा दी उस ने

अब्दुल हमीद

कुछ अपना पता दे कर हैरान बहुत रक्खा

अब्दुल हमीद

कभी देखो तो मौजों का तड़पना कैसा लगता है

अब्दुल हमीद

कितनी महबूब थी ज़िंदगी कुछ नहीं कुछ नहीं

अब्दुल हमीद

किसी का क़हर किसी की दुआ मिले तो सही

अब्दुल हमीद

किसी दश्त ओ दर से गुज़रना भी क्या

अब्दुल हमीद

दिल में जो बात है बताते नहीं

अब्दुल हमीद

पाँव रुकते ही नहीं ज़ेहन ठहरता ही नहीं

अब्दुल हमीद

साए फैल गए खेतों पर कैसा मौसम होने लगा

अब्दुल हमीद

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI