Jayant Parmar's Photo'

जयंत परमार

1955 | अहमदाबाद, भारत

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित, उर्दू में दलित विशर्ष दाखिल करने वाले पहले शायर

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित, उर्दू में दलित विशर्ष दाखिल करने वाले पहले शायर

ग़ज़ल 5

 

नज़्म 10

शेर 5

दिल को दुखाती है फिर भी क्यूँ अच्छी लगती है

यादों की ये शाम सुहानी दिल में क़ैद हुई

बिस्तर पे लेटे लेटे मिरी आँख लग गई

ये कौन मेरे कमरे की बत्ती बुझा गया

जुगनू था तारा था क्या था

दरवाज़े पर कौन खड़ा था

दोहा 6

आस बँधाती है सदा सुख की होगी भोर

अपने इरादों को अभी मत करना कमज़ोर

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चाहत की भाषा नहीं शब्दों को मत तोल

ख़ामोशी का गीत सुन चाँद की खिड़की खोल

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जाड़े की रुत है नई तन पर नीली शाल

तेरे साथ अच्छी लगी सर्दी अब के साल

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पुस्तकें 8

Antaral

 

2010

Giacometti ke Sapne

 

2016

मानिन्द

 

 

नज़्म यानी

 

2013

Pencil : Aur Doosri Nazmain

 

2005

Pencil Aur Doosri Nazmein

 

2006

Naya Waraq,Mumbai

Gosha-e-Dahshat Pasandi, Nida Fazli, Jayant Parmar : Shumara Number-031

2009

 

ऑडियो 5

उस ने मज़ाक़ समझा मिरा दिल दुखा गया

ग़ुबार-ए-जाँ से सितारा निकलना चाहता है

चाँद उन आँखों ने देखा और है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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