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जयंत परमार

1955 | अहमदाबाद, भारत

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित, उर्दू में दलित विशर्ष दाखिल करने वाले पहले शायर

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित, उर्दू में दलित विशर्ष दाखिल करने वाले पहले शायर

जयंत परमार के ऑडियो

ग़ज़ल

उस ने मज़ाक़ समझा मिरा दिल दुखा गया

जयंत परमार

ग़ुबार-ए-जाँ से सितारा निकलना चाहता है

जयंत परमार

चाँद उन आँखों ने देखा और है

जयंत परमार

जुगनू था तारा था क्या था

जयंत परमार

लफ़्ज़ों की तस्वीर बनाती दिल में क़ैद हुई

जयंत परमार

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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