Aashufta Changezi's Photo'

आशुफ़्ता चंगेज़ी

1956 | अलीगढ़, भारत

प्रख्यात उत्तर-आधुनिक शायर, 1996 में अचानक लापता हो गए।

प्रख्यात उत्तर-आधुनिक शायर, 1996 में अचानक लापता हो गए।

ग़ज़ल 33

नज़्म 14

शेर 35

हमें भी आज ही करना था इंतिज़ार उस का

उसे भी आज ही सब वादे भूल जाने थे

किस की तलाश है हमें किस के असर में हैं

जब से चले हैं घर से मुसलसल सफ़र में हैं

सवाल करती कई आँखें मुंतज़िर हैं यहाँ

जवाब आज भी हम सोच कर नहीं आए

पुस्तकें 3

Gard Baad

 

1979

Shahr-e-Guman

 

1988

शिकस्तों की फ़स्ल

 

1978

 

चित्र शायरी 8

जिस से मिल बैठे लगी वो शक्ल पहचानी हुई आज तक हम से यही बस एक नादानी हुई सैकड़ों पर्दे उठा लाए थे हम बाज़ार से गुत्थियाँ कुछ और उलझीं और हैरानी हुई हम तो समझे थे कि उस से फ़ासले मिट जाएँगे ख़ुद को ज़ाहिर भी किया लेकिन पशेमानी हुई क्या बताएँ फ़िक्र क्या है और क्या है जुस्तुजू हाँ तबीअत दिन-ब-दिन अपनी भी सैलानी हुई क्यूँ खिलौने टूटने पर आब-दीदा हो गए अब तुम्हें हम क्या बताएँ क्या परेशानी हुई

इतना क्यूँ शरमाते हैं वादे आख़िर वादे हैं लिखा लिखाया धो डाला सारे वरक़ फिर सादे हैं तुझ को भी क्यूँ याद रखा सोच के अब पछताते हैं रेत महल दो चार बचे ये भी गिरने वाले हैं जाएँ कहीं भी तुझ को क्या शहर से तेरे जाते हैं घर के अंदर जाने के और कई दरवाज़े हैं उँगली पकड़ के साथ चले दौड़ में हम से आगे हैं

 

ऑडियो 11

अजब रंग आँखों में आने लगे

ख़बर तो दूर अमीन-ए-ख़बर नहीं आए

गुज़र गए हैं जो मौसम कभी न आएँगे

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

  • शहपर रसूल शहपर रसूल समकालीन
  • महताब हैदर नक़वी महताब हैदर नक़वी समकालीन
  • सलाहुद्दीन परवेज़ सलाहुद्दीन परवेज़ समकालीन
  • हिलाल फ़रीद हिलाल फ़रीद समकालीन
  • फ़रहत एहसास फ़रहत एहसास समकालीन
  • शुजा ख़ावर शुजा ख़ावर समकालीन
  • समीना राजा समीना राजा समकालीन
  • परवीन शाकिर परवीन शाकिर समकालीन
  • जयंत परमार जयंत परमार समकालीन

"अलीगढ़" के और शायर

  • शहरयार शहरयार
  • असअ'द बदायुनी असअ'द बदायुनी
  • सय्यद अमीन अशरफ़ सय्यद अमीन अशरफ़
  • वफ़ा नक़वी वफ़ा नक़वी
  • राहत हसन राहत हसन
  • महताब हैदर नक़वी महताब हैदर नक़वी