ग़ज़ल 14

शेर 4

शाइ'री झूट सही इश्क़ फ़साना ही सही

ज़िंदा रहने के लिए कोई बहाना ही सही

सफ़र की शाम सितारा नसीब का जागा

फिर आसमान-ए-मोहब्बत पे इक हिलाल खिला

आब-ए-हैराँ पर किसी का अक्स जैसे जम गया

आँख में बस एक लम्हे के लिए ठहरा ख़याल

क्या करें आँख अगर उस से सिवा चाहती है

ये जहान-ए-गुज़राँ आइना-ख़ाना ही सही

पुस्तकें 1

Huwaida

 

1995

 

ऑडियो 5

दिल माँगे है मौसम फिर उम्मीदों का

हम तो यूँ उलझे कि भूले आप ही अपना ख़याल

ये रस्ता

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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