एक सितारा टूट गिरा था

जयंत परमार

एक सितारा टूट गिरा था

जयंत परमार

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    ख़्वाबों की सरहद पे

    नीला नीला एक समुंदर

    तेरी आँखों जैसा

    लहरों के नेज़ों पे बहती

    जगमग जगमग चाँद सी रौशन

    अपने प्यार की कश्ती

    सात समुंदर से भी दूर

    तूफ़ानों से खेलती

    जल परियों से बातें करती

    वापस लौट आई तो

    साहिल की चमकीली रेत में

    एक सितारा टूट गिरा था

    स्रोत :
    • पुस्तक : aazaadii ke baad urdu nazm (पृष्ठ 729)
    • रचनाकार : shamiim hanfii
    • प्रकाशन : national council for promotion of urdu language

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