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यगाना चंगेज़ी

1884 - 1956 | लखनऊ, भारत

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

यगाना चंगेज़ी के ऑडियो

ग़ज़ल

अगर अपनी चश्म-ए-नम पर मुझे इख़्तियार होता

फ़सीह अकमल

अदब ने दिल के तक़ाज़े उठाए हैं क्या क्या

फ़सीह अकमल

आँख दिखलाने लगा है वो फ़ुसूँ-साज़ मुझे

फ़सीह अकमल

आप से आप अयाँ शाहिद-ए-मअ'नी होगा

फ़सीह अकमल

कारगाह-ए-दुनिया की नेस्ती भी हस्ती है

फ़सीह अकमल

क़िस्सा किताब-ए-उम्र का क्या मुख़्तसर हुआ

फ़सीह अकमल

ख़ुदी का नश्शा चढ़ा आप में रहा न गया

फ़सीह अकमल

चले चलो जहाँ ले जाए वलवला दिल का

फ़सीह अकमल

चलता नहीं फ़रेब किसी उज़्र-ख़्वाह का

फ़सीह अकमल

दिल लगाने की जगह आलम-ए-ईजाद नहीं

फ़सीह अकमल

बैठा हूँ पाँव तोड़ के तदबीर देखना

फ़सीह अकमल

यार है आइना है शाना है

फ़सीह अकमल

वहशत थी हम थे साया-ए-दीवार-ए-यार था

फ़सीह अकमल

वाँ नक़ाब उट्ठी कि सुब्ह-ए-हश्र का मंज़र खुला

फ़सीह अकमल

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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