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जलील मानिकपूरी

1866 - 1946 | हैदराबाद, भारत

सबसे लोकप्रिय उत्तर क्लासिकी शायरों में प्रमुख/अमीर मीनाई के शार्गिद/दाग़ देहलवी के बाद हैदराबाद के राज-कवि

सबसे लोकप्रिय उत्तर क्लासिकी शायरों में प्रमुख/अमीर मीनाई के शार्गिद/दाग़ देहलवी के बाद हैदराबाद के राज-कवि

ग़ज़ल 87

शेर 337

आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें

दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की

when you come into my arms you should be aware

my restless heart is wont to leap, it may give you a scare

when you come into my arms you should be aware

my restless heart is wont to leap, it may give you a scare

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मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता है

मगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है

बात उल्टी वो समझते हैं जो कुछ कहता हूँ

अब की पूछा तो ये कह दूँगा कि हाल अच्छा है

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ई-पुस्तक 3

Fasahat Jung Jaleel Manikpuri

Hayat Shakhsiyat Fan

1993

Jaleel Manikpuri : Hayat Aur Karname

 

1978

Qasaid-o-Qataat Tareekh

 

1995

 

चित्र शायरी 23

ऑडियो 12

कहाँ हम और कहाँ अब शराब-ख़ाना-ए-इश्क़

उस का जल्वा जो कोई देखने वाला होता

ज़ालिम बुतों से आँख लगाई न जाएगी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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