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जलील मानिकपूरी

1866 - 1946 | हैदराबाद, भारत

सबसे लोकप्रिय उत्तर क्लासिकी शायरों में प्रमुख/अमीर मीनाई के शार्गिद/दाग़ देहलवी के बाद हैदराबाद के राज-कवि

सबसे लोकप्रिय उत्तर क्लासिकी शायरों में प्रमुख/अमीर मीनाई के शार्गिद/दाग़ देहलवी के बाद हैदराबाद के राज-कवि

जलील मानिकपूरी

ग़ज़ल 86

शेर 341

आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें

दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की

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तसद्दुक़ इस करम के मैं कभी तन्हा नहीं रहता

कि जिस दिन तुम नहीं आते तुम्हारी याद आती है

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मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता है

मगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है

ये जो सर नीचे किए बैठे हैं

जान कितनों की लिए बैठे हैं

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बात उल्टी वो समझते हैं जो कुछ कहता हूँ

अब की पूछा तो ये कह दूँगा कि हाल अच्छा है

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पुस्तकें 5

 

चित्र शायरी 28

ऑडियो 12

कहाँ हम और कहाँ अब शराब-ख़ाना-ए-इश्क़

उस का जल्वा जो कोई देखने वाला होता

ज़ालिम बुतों से आँख लगाई न जाएगी

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI