Sulaiman Areeb's Photo'

सुलैमान अरीब

1922 - 1970 | हैदराबाद, भारत

आधुनिक साहित्य के संस्थापक पत्रिका के संपादक।

आधुनिक साहित्य के संस्थापक पत्रिका के संपादक।

ग़ज़ल 15

नज़्म 14

शेर 2

'अरीब' देखो इतराओ चंद शेरों पर

ग़ज़ल वो फ़न है कि 'ग़ालिब' को तुम सलाम करो

एक हम्माम में तब्दील हुई है दुनिया

सब ही नंगे हैं किसे देख के शरमाऊँ मैं

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ई-पुस्तक 35

हैदराबाद के शायर

खण्ड-002

1962

Kadvi Khushboo

 

1973

पास-ए-गरेबाँ

 

1961

Pas-e-Gareban

 

1961

सबा

शुमारा नम्बर-006,007

1956

सबा

शुमारा नम्बर-006,007

1957

सबा

शुमारा नम्बर-8, 9, 10

1956

Saba

Shumara Number-010,011

1964

Saba

Shumara Number-004

1964

सबा

शुमारा नम्बर-002, 003

1957

चित्र शायरी 1

कोई दुश्मन कोई हमदम भी नहीं साथ अपने तू नहीं है तो दो-आलम भी नहीं साथ अपने साथ कुछ दूर तिरे हम भी गए थे लेकिन अब कहाँ जाएँ कि ख़ुद हम भी नहीं साथ अपने वो भी इक वक़्त तक ख़ुर्शीद-ब-कफ़ फिरते थे ये भी इक वक़्त है शबनम भी नहीं साथ अपने नाख़ुन-ए-वक़्त ने कब ज़ख़्म को दहकाया है ऐसे इक वक़्त कि मरहम भी नहीं साथ अपने सामने कितनी सलीबें हैं पए बे-गुनही आज लख़्त-ए-दिल-ए-मर्यम भी नहीं साथ अपने पी के सोचा कि ख़रीदेंगे ग़म-ए-दुनिया भी तय हुए दाम तो दिरहम भी नहीं साथ अपने

 

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