Akhtar Shirani's Photo'

अख़्तर शीरानी

1905 - 1948 | लाहौर, पाकिस्तान

सबसे लोकप्रिय उर्दू शायरों में से एक। गहरी रूमानी शायरी के लिए प्रसिद्ध

सबसे लोकप्रिय उर्दू शायरों में से एक। गहरी रूमानी शायरी के लिए प्रसिद्ध

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
अन्य वीडियो
Ai ishq hamen barbad na kar

मलिका पुखराज

Ai Ishq Humhein Barbad na Kar

नय्यरा नूर

Bhulaoge bahut lekin tumhen ham yaad

मुन्नी बेगम

Har ek jalwa e rangeen meri nigah mein hai

ताहिरा सैयद

ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर

ऐ इश्क़ न छेड़ आ आ के हमें हम भूले हुओं को याद न कर नय्यरा नूर

ओ देस से आने वाले बता

ओ देस से आने वाला है बता आबिदा परवीन

ओ देस से आने वाले बता

ओ देस से आने वाला है बता नासिर जहाँ

कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता

इक़बाल बानो

क्या कह गई किसी की नज़र कुछ न पूछिए

हबीब वली मोहम्मद

निकहत-ए-ज़ुल्फ़ से नींदों को बसा दे आ कर

मलिका पुखराज

मैं आरज़ू-ए-जाँ लिखूँ या जान-ए-आरज़ू!

अज्ञात

मिरी शाम-ए-ग़म को वो बहला रहे हैं

मलिका पुखराज

वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए

ग़ुलाम अली

वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए

फ़रीदा ख़ानम

वो कहते हैं रंजिश की बातें भुला दें

ताहिरा सैयद

हर एक जल्वा-ए-रंगीं मिरी निगाह में है

अज्ञात

अन्य वीडियो

  • Ai ishq hamen barbad na kar

    Ai ishq hamen barbad na kar मलिका पुखराज

  • Ai Ishq Humhein Barbad na Kar

    Ai Ishq Humhein Barbad na Kar नय्यरा नूर

  • Bhulaoge bahut lekin tumhen ham yaad

    Bhulaoge bahut lekin tumhen ham yaad मुन्नी बेगम

  • Har ek jalwa e rangeen meri nigah mein hai

    Har ek jalwa e rangeen meri nigah mein hai ताहिरा सैयद

  • ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर

    ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर नय्यरा नूर

  • ओ देस से आने वाले बता

    ओ देस से आने वाले बता आबिदा परवीन

  • ओ देस से आने वाले बता

    ओ देस से आने वाले बता नासिर जहाँ

  • कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता

    कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता इक़बाल बानो

  • क्या कह गई किसी की नज़र कुछ न पूछिए

    क्या कह गई किसी की नज़र कुछ न पूछिए हबीब वली मोहम्मद

  • निकहत-ए-ज़ुल्फ़ से नींदों को बसा दे आ कर

    निकहत-ए-ज़ुल्फ़ से नींदों को बसा दे आ कर मलिका पुखराज

  • मैं आरज़ू-ए-जाँ लिखूँ या जान-ए-आरज़ू!

    मैं आरज़ू-ए-जाँ लिखूँ या जान-ए-आरज़ू! अज्ञात

  • मिरी शाम-ए-ग़म को वो बहला रहे हैं

    मिरी शाम-ए-ग़म को वो बहला रहे हैं मलिका पुखराज

  • वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए

    वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए ग़ुलाम अली

  • वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए

    वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए फ़रीदा ख़ानम

  • वो कहते हैं रंजिश की बातें भुला दें

    वो कहते हैं रंजिश की बातें भुला दें ताहिरा सैयद

  • हर एक जल्वा-ए-रंगीं मिरी निगाह में है

    हर एक जल्वा-ए-रंगीं मिरी निगाह में है अज्ञात

Added to your favorites

Removed from your favorites