Hafeez Jalandhari's Photo'

हफ़ीज़ जालंधरी

1900 - 1982 | लाहौर, पाकिस्तान

लोकप्रिय रूमानी शायर , मलिका पुखराज ने उनकी नज़्म ' अभी तो मैं जवान हूँ ' , को गा कर प्रसिध्दि दी। पाकिस्तान का राष्ट्रगान लिखा।

लोकप्रिय रूमानी शायर , मलिका पुखराज ने उनकी नज़्म ' अभी तो मैं जवान हूँ ' , को गा कर प्रसिध्दि दी। पाकिस्तान का राष्ट्रगान लिखा।

ग़ज़ल 67

नज़्म 18

शेर 81

इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ

कहीं ऐसा हो जाए कहीं ऐसा हो जाए

दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब

मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं

may my friends too receive this wealth of pain

I cannot envisage my solitary gain

may my friends too receive this wealth of pain

I cannot envisage my solitary gain

  • शेयर कीजिए

'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली

उर्दू हिन्दी हिन्दोस्तानी

  • शेयर कीजिए

क़ितआ 20

लतीफ़े 3

 

बच्चों की कहानी 2

 

ई-पुस्तक 54

Bahar Ke Phool

 

1940

Bazm Nahin Razm

 

1973

चराग़-ए-सहर

 

 

Hafeez Jalandhari Ka Fun

 

2007

Hafeez Jalandhari Ka Salam

 

 

हफ़ीज़ जालंधरी की शायरी

 

1983

हफ़ीज़ के गीत और नज़्में

 

1941

Haft Paikar

 

 

Hindustan Ke Pasban

 

 

इंतिख़ाब कलाम-ए-हफ़ीज़

 

1960

चित्र शायरी 6

वफ़ाओं के बदले जफ़ा कर रहे हैं मैं क्या कर रहा हूँ वो क्या कर रहे हैं

दोस्ती का चलन रहा ही नहीं अब ज़माने की वो हवा ही नहीं सच तो ये है सनम-कदे वालो दिल ख़ुदा ने तुम्हें दिया ही नहीं पलट आने से हो गया साबित नामा-बर तू वहाँ गया ही नहीं हाल ये है कि हम ग़रीबों का हाल तुम ने कभी सुना ही नहीं क्या चले ज़ोर दश्त-ए-वहशत का हम ने दामन कभी सिया ही नहीं ग़ैर भी एक दिन मरेंगे ज़रूर उन के हिस्से में क्या क़ज़ा ही नहीं उस की सूरत को देखता हूँ मैं मेरी सीरत वो देखता ही नहीं इश्क़ मेरा है शहर में मशहूर और तुम ने अभी सुना ही नहीं क़िस्सा-ए-क़ैस सुन के फ़रमाया झूट की कोई इंतिहा ही नहीं वास्ता किस का दें 'हफ़ीज़' उन को उन बुतों का कोई ख़ुदा ही नहीं

 

वीडियो 15

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
जवानी के तराने गा रहा हूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

जहाँ क़तरे को तरसाया गया हूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके

हफ़ीज़ जालंधरी

ऑडियो 7

अभी तो मैं जवान हूँ

आख़िरी रात

'इक़बाल' के मज़ार पर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

"लाहौर" के और शायर

  • अख़्तर शीरानी अख़्तर शीरानी
  • एहसान दानिश एहसान दानिश
  • क़तील शिफ़ाई क़तील शिफ़ाई
  • मुनीर नियाज़ी मुनीर नियाज़ी
  • नासिर काज़मी नासिर काज़मी
  • हबीब जालिब हबीब जालिब
  • ज़फ़र इक़बाल ज़फ़र इक़बाल
  • मोहम्मद हुसैन आज़ाद मोहम्मद हुसैन आज़ाद
  • मोहम्मद हनीफ़ रामे मोहम्मद हनीफ़ रामे
  • सूफ़ी तबस्सुम सूफ़ी तबस्सुम