Rasa Chughtai's Photo'

रसा चुग़ताई

1928 - 2018 | कराची, पाकिस्तान

ग़ज़ल 37

शेर 33

तुझ से मिलने को बे-क़रार था दिल

तुझ से मिल कर भी बे-क़रार रहा

आहटें सुन रहा हूँ यादों की

आज भी अपने इंतिज़ार में गुम

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इश्क़ में भी सियासतें निकलीं

क़ुर्बतों में भी फ़ासला निकला

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ई-पुस्तक 2

Rekhta

 

1986

तेरे आने का इंतिज़ार रहा

 

2007

 

चित्र शायरी 4

सामने जी सँभाल कर रखना फिर वही अपना हाल कर रखना आ गए हो तो इस ख़राबे में अब क़दम देख-भाल कर रखना शाम ही से बरस रही है रात रंग अपने सँभाल कर रखना इश्क़ कार-ए-पयम्बराना है जिस को छूना मिसाल कर रखना किश्त करना मोहब्बतें और फिर ख़ुद उसे पाएमाल कर रखना रोज़ जाना उदास गलियों में रोज़ ख़ुद को निढाल कर रखना सख़्त मुश्किल है आइनों से 'रसा' वाहिमों को निकाल कर रखना

आहटें सुन रहा हूँ यादों की आज भी अपने इंतिज़ार में गुम

 

वीडियो 10

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Reciting own poetry

रसा चुग़ताई

कहाँ जाते हैं आगे शहर-ए-जाँ से

रसा चुग़ताई

जब भी तेरी यादों का सिलसिला सा चलता है

रसा चुग़ताई

निकल कर साया-ए-अब्र-ए-रवाँ से

रसा चुग़ताई

मैं ने सोचा था इस अजनबी शहर में ज़िंदगी चलते-फिरते गुज़र जाएगी

रसा चुग़ताई

मोहब्बत ख़ब्त है या वसवसा है

रसा चुग़ताई

सर उठाया तो सर रहेगा क्या

रसा चुग़ताई

है लेकिन अजनबी ऐसा नहीं है

रसा चुग़ताई

ऑडियो 9

अपनी बे-चेहरगी में पत्थर था

इस से पहले नज़र नहीं आया

ज़िंदगी के सराब भी देखूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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