aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली , दीवाली , श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर
कहा जो हम ने ''हमें दर से क्यूँ उठाते हो''
कहा कि ''इस लिए तुम याँ जो ग़ुल मचाते हो''