aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
शब्दार्थ
ग़म-ए-दौराँ ग़म-ए-जानाँ ग़म-ए-उक़्बा ग़म-ए-दुनिया
'कँवल' इस ज़िंदगी में ग़म के मारों को न चैन आया
"तअज्जुब ये नहीं है ग़म के मारों को न चैन आया" ग़ज़ल से की कँवल डिबाइवी