aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
पुण्य तिथि
प्रख्यात पूर्व-आधुनिक शायर, जिगर मुरादाबादी के समकालीन।
जिन रातों में नींद उड़ जाती है क्या क़हर की रातें होती हैं
दरवाज़ों से टकरा जाते हैं दीवारों से बातें होती हैं