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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Mela Ram Wafa's Photo'

मेला राम वफ़ा

1895 - 1980 | पंजाब, पाकिस्तान

पंजाब के राज कवि,पत्रकार,शायर एवं कहानीकार

पंजाब के राज कवि,पत्रकार,शायर एवं कहानीकार

मेला राम वफ़ा के शेर

इक बार उस ने मुझ को देखा था मुस्कुरा कर

इतनी तो है हक़ीक़त बाक़ी कहानियाँ हैं

गो क़यामत से पेशतर न हुई

तुम न आए तो क्या सहर न हुई

तुम भी करोगे जब्र शब ओ रोज़ इस क़दर

हम भी करेंगे सब्र मगर इख़्तियार तक

रातें ऐश-ओ-इशरत की दिन दुख दर्द मुसीबत के

आती आती आती हैं जाते जाते जाते हैं

इतनी तौहीन न कर मेरी बला-नोशी की

साक़िया मुझ को न दे माप के पैमाने से

कहना ही मिरा क्या है कि मैं कुछ नहीं कहता

ये भी तुम्हें धोका है कि मैं कुछ नहीं कहता

आलम है तिरे परतव-ए-रुख़ से ये हमारा

हैरत से हमें शम्स-ओ-क़मर देख रहे हैं

दिन जुदाई का दिया वस्ल की शब के बदले

लेने थे ऐ फ़लक-ए-पीर ये कब के बदले

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