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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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मुईद रशीदी

1988 | अलीगढ़, भारत

नई नस्ल के मुमताज़ शायरों और नक़्क़ादों में शुमार, साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित

नई नस्ल के मुमताज़ शायरों और नक़्क़ादों में शुमार, साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित

मुईद रशीदी

ग़ज़ल 125

अशआर 146

चंद यादों के दिए थोड़ी तमन्ना कुछ ख़्वाब

ज़िंदगी तुझ से ज़ियादा नहीं माँगा हम ने

उस बार उजालों ने मुझे घेर लिया था

इस बार मिरी रात मिरे साथ चली है

जो बिछड़ गया वो मिला नहीं ये सवाल था

जो मिला नहीं वो बिछड़ गया ये कमाल है

अक़्ल नहीं आएँगे बातों में तिरी हम

नादान थे नादान हैं नादान रहेंगे

मुझ को पाने की तमन्ना में वो ग़र्क़ाब हुआ

मैं ने साहिल की तमन्ना में उसे खोया है

पुस्तकें 6

 

वीडियो 11

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ऑडियो 3

आज कुछ सूरत-ए-अफ़्लाक जुदा लगती है

दरून-ए-ज़ात हुजूम-ए-अज़ाब ठहरा है

मैं कोई दश्त मैं दीवार नहीं कर सकता

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