नासिर अब्बास नय्यर के लेख
इक़बाल और मॉडर्निज़्म की बहस
मॉडर्निज़्म इक़बाल के दौर की एक समकालीन यूरोपीय अदबी तहरीक (साहित्यिक आंदोलन) थी। इसका ज़माना 1910 से 1930 तक माना जाता है। समकालीन तहरीक होने के बावजूद इसके सीधे असर इक़बाल की शायरी पर नज़र नहीं आते। ऐसे में यह सवाल बेहद अहम हो जाता है कि क्या इक़बाल
क्या किसी नज़रिए को मौत जैसे अल्फ़ाज़ दिए जा सकते है?
उर्दू के कुछ आलोचकों की राय है कि पश्चिम में थ्योरी का ख़ात्मा हो गया है, और उर्दू में थ्योरी की बहसें बेवक़्त की रागनी हैं। वे अपनी राय के हक़ में और बातों के अलावा टेरी ईगलटन की 2003 में प्रकाशित होने वाली किताब 'थ्योरी के बाद' (After Theory) का हवाला