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राजेन्द्र मनचंदा बानी

1932 - 1981 | दिल्ली, भारत

आधुनिक उर्दू ग़ज़ल की सबसे शक्तिशाली आवाज़ों में शामिल।

आधुनिक उर्दू ग़ज़ल की सबसे शक्तिशाली आवाज़ों में शामिल।

ग़ज़ल 75

नज़्म 13

शेर 42

वो टूटते हुए रिश्तों का हुस्न-ए-आख़िर था

कि चुप सी लग गई दोनों को बात करते हुए

दोस्त मैं ख़ामोश किसी डर से नहीं था

क़ाइल ही तिरी बात का अंदर से नहीं था

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ओस से प्यास कहाँ बुझती है

मूसला-धार बरस मेरी जान

पुस्तकें 8

Harf-e-Motabar

 

1971

हर्फ़-ए-मोतबर

 

1971

Hijr To Rooh Ka Mausam Hai

 

 

हिसाब-ए-रंग

 

1976

शफ़क़ शजर

 

1982

 

ऑडियो 18

इक गुल-ए-तर भी शरर से निकला

ख़ाक ओ ख़ूँ की वुसअतों से बा-ख़बर करती हुई

घनी-घनेरी रात में डरने वाला मैं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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