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अहमद जैनुद्दीन की कहानियाँ
आँसू सच बोलते हैं...?
यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो दुःखी, लाचार, भिखारी बनकर लोगों को ठगने का काम करता है। उसे ट्यूबवेल के पास खड़ा रोता देखकर जब पीने के लिए पानी और खाने के लिए खाना दिया गया तो उसे कुछ राहत मिली थी। बाद में उसने बताया कि वह अयोध्या से बक्सर अपनी माँ का कैंसर का इलाज कराने आया था। माँ तो बच नहीं सकी, उसका सारा सामान भी चोरी हो गया। उस पर दया करते हुए आपा ने उसे अपनी सारी जमा-पूँजी दे दी थी। वापसी के लिए जब मैं स्टेशन जा रहा था तो मैंने रास्ते में देखा कि वह व्यक्ति एक दूसरे आदमी को अपनी वही राम-कहानी सुना रहा था।
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