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अख़्तर ओरेनवी

1911 - 1977 | मुंगेर, भारत

प्रसिद्ध आलोचक, शोधकर्ता, कथाकार और शायर,अपनी रोमांटिक नज़्मों के लिए भी जाने गए।

प्रसिद्ध आलोचक, शोधकर्ता, कथाकार और शायर,अपनी रोमांटिक नज़्मों के लिए भी जाने गए।

अख़्तर ओरेनवी

कहानी 9

उद्धरण 1

मौत और ज़िंदगी के दरमियान भी इंसानियत दर्जों में बटी हुई है। घर, अस्पताल और क़ब्रिस्तान हर जगह नंबर एक, नंबर दो तीन की तफ़रीक़ होती है।

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अशआर 5

मिज़ाज-ए-नाज़-ए-जल्वा कभी पा सकीं निगाहें

कि उलझ के रह गई हैं तिरी ज़ुल्फ़-ए-ख़म-ब-ख़म में

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मैं मुंतज़िर हूँ तेरी तमन्ना लिए हुए

जा फ़रोग़-ए-हुस्न की दुनिया लिए हुए

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जुनूँ भी ज़हमत ख़िरद भी ल'अनत है ज़ख़्म-ए-दिल की दवा मोहब्बत

हरीम-ए-जाँ में तवाफ़-ए-पैहम यही है अंदाज़-ए-आशिक़ाना

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कितने ताबाँ थे वो लम्हात तिरे पहलू में

दो घड़ी मेरी भी फ़िरदौस मिना गुज़री है

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मिरी आरज़ू की तस्कीं करम में ने सितम में

मिरा दिल मुदाम तिश्ना तिरी रह के पेच-ओ-ख़म में

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ग़ज़ल 10

पुस्तकें 24

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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