इरशाद आतिफ़ के शेर
ख़ुदकुशी से सबक़ मिला हम को
ज़िंदगी मौत से तो बेहतर है
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उजाला बेचने वो आ गए हैं आज पस्ती में
जो कल कह कर गए थे हम अँधेरों को मिटाएँगे
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मैं भला बच पाता कैसे ज़ुल्म के पथराव से
काँच की दीवार से मेरी हिफ़ाज़त की गई
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नेकियाँ करने का 'आतिफ़' क्या 'अजब अंदाज़ है
सैकड़ों को लूट कर कुछ पर सख़ावत की गई
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वो जिस की आबरू मैं ने बचाई थी 'आतिफ़'
सुबूत माँगता है मुझ से पारसाई का
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