इश्क़ औरंगाबादी
ग़ज़ल 40
अशआर 18
आईना कभी क़ाबिल-ए-दीदार न होवे
गर ख़ाक के साथ उस को सरोकार न होवे
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
अन्य शायरों को पढ़िए
-
पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
-
जुरअत क़लंदर बख़्श
-
मीर हसन
-
करामत अली शहीदी
-
मिर्ज़ा दाऊद बेग
-
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
-
सरदार गंडा सिंह मशरिक़ी
-
नैन सुख
-
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
-
महेश चंद्र नक़्श
-
सफ़ी औरंगाबादी
-
जमील अज़ीमाबादी
-
साहिर सियालकोटी
-
अजीत सिंह हसरत
-
मिर्ज़ा जवाँ बख़्त जहाँदार
-
आज़ाद गुलाटी
-
निज़ाम रामपुरी
-
साहिर लुधियानवी
-
अहमद फ़राज़
-
सिराजुद्दीन ज़फ़र