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जावेद वशिष्ट

1920 - 1994 | दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 10

शेर 8

काँटों पे चले हैं तो कहीं फूल खिले हैं

फूलों से मिले हैं तो बड़ी चोट लगी है

ग़म से एहसास का आईना जिला पाता है

और ग़म सीखे है कर ये सलीक़ा मुझ से

ये तो वक़्त वक़्त की बात है हमें उन से कोई गिला नहीं

वो हों आज हम से ख़फ़ा ख़फ़ा कभू हम से उन को भी प्यार था

ई-पुस्तक 11

Bahr-ul-Maani

Dakani Urdu Ka Lughat

1987

Dakhni Darpan

 

 

Ghazal-e-Rana

 

1968

Mahfil-e-Sukhan

 

1985

Mulla Wajhi

 

1984

Mulla Wajhi Ke Inshaiye

 

1972

Roop Ras

 

1971

रूप रस

 

1971

Sab Ras Ka Qissa Husan-o-Dil

 

 

Shola-e-Tishnagi

 

1963

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