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मध्यकालीन भक्ति-साहित्य की निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के अत्यंत महत्त्वपूर्ण और विद्रोही संत-कवि।

मध्यकालीन भक्ति-साहित्य की निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के अत्यंत महत्त्वपूर्ण और विद्रोही संत-कवि।

कबीर

पुस्तकें 8

 

स्कॉलर 3

क्लासिकियत से बग़ावत: कबीर की जनकाव्य-दृष्टि और संघर्ष का नारा

कबीर ने रिवायती और क्लासिकी शायरी को ख़ारिज करते हुए एक नई अवामी शायरी की बुनियाद रखी, जो दरअस्ल उस वक़्त के ज़ालिम सामाजिक ढांचे के ख़िलाफ़ एक बग़ावत थी।

झीनी-झीनी बीनी चदरिया: कबीर की रूपकीय व्यवस्था और इंसानी वुजूद

कबीर ने अपने पेशे यानी कपड़ा बुनने की शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए इंसानी ज़िंदगी, रूह और कायनात के पेचीदा फ़लसफ़े को एक निहायत ख़ूबसूरत और अछूते रूपक में ढाल दिया।

सूफ़ियों और भक्तों की ज़बान: अवाम से राब्ते का ज़रिया

अमीर ख़ुसरो, सूफ़ी बुज़ुर्गों और भक्ति तहरीक के संतों ने किस तरह उर्दू और हिंदी की मुश्तरका (साझा) ज़बान को अवाम के दिलों तक पहुँचने का ज़रिया बनाया।

 

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