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लेव तालस्तोय का परिचय
पहचान: विश्व के महानतम रूसी उपन्यासकार, नाटककार, दार्शनिक, अहिंसा के प्रबल समर्थक और 'वॉर एंड पीस' (युद्ध और शांति) जैसे वैश्विक शाहकार के निर्माता।
लियो टॉल्स्टॉय (लियो तोलस्तोय) का जन्म 9 सितंबर 1828 को रूस के तुला क्षेत्र में स्थित यास्नाया पोल्याना के एक ज़मींदार परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम लियो निकोलायेविच टॉल्स्टॉय था।
टॉल्स्टॉय महज नौ वर्ष की आयु में माता-पिता के साये से महरुम (अनाथ) हो गए, जिसके बाद उनकी और उनके भाई-बहनों की परवरिश विभिन्न रिश्तेदारों ने की। बचपन में उन्होंने फ्रांसीसी और जर्मन शिक्षकों से घर पर ही शिक्षा प्राप्त की।
16 वर्ष की आयु में उन्होंने काज़ान विश्वविद्यालय (Kazan University) में कानून और प्राच्य भाषाओं (Oriental Languages) के विभाग में प्रवेश लिया। हालांकि, शिक्षक उन्हें एक 'नालायक और लापरवाह' छात्र समझते थे। शिक्षकों और सहपाठियों के नकारात्मक रवैये से निराश होकर उन्होंने डिग्री हासिल किए बिना पढ़ाई अधूरी छोड़ दी और अपनी पैतृक जागीर लौट आए।
1849 में उन्होंने अपनी जागीर पर किसानों के बच्चों के कल्याण और शिक्षा के लिए एक स्कूल खोला, जो जल्द ही असफल हो गया। इसके बाद वे मास्को और सेंट पीटर्सबर्ग चले गए जहाँ उन्होंने रूसी किसानों की दयनीय स्थिति और सामाजिक जीवन का गहरा अध्ययन किया।
1851 में वे सेना में शामिल हुए और तुर्कों के खिलाफ युद्ध (क्रिमियाई युद्ध) में भाग लिया। सेना में रहने के दौरान ही उन्होंने अपनी आत्मकथा पर आधारित पहला उपन्यास "बचपन" (Childhood) लिखा, जो 1852 में प्रकाशित हुआ। बाद में उन्होंने "लड़कपन" (Boyhood) और "जवानी" (Youth) के माध्यम से इस श्रृंखला को आगे बढ़ाया।
सेना की भयावहता और घेराबंदी के प्रत्यक्ष अनुभवों पर आधारित उनकी पुस्तक "सेवास्तोपोल की कहानियाँ" (Sevastopol Sketches) ने उन्हें साहित्यिक दुनिया में एक प्रतिष्ठित पहचान दिलाई। जल्द ही वे सैन्य जीवन से ऊब गए और सेंट पीटर्सबर्ग लौट आए और इवान तुर्गनेव जैसे समकालीन लेखकों से मित्रता कर ली।
1857 और 1860 में टॉल्स्टॉय ने पश्चिमी यूरोप की लंबी यात्रा की ताकि आधुनिक यूरोपीय सभ्यता को करीब से समझ सकें। यूरोप से लौटने पर 1862 में उन्होंने विवाह किया और अगले पंद्रह वर्ष लगातार अपनी जागीर पर बिताए। यही उनके जीवन का सबसे उर्वर (रचनात्मक) काल था जिसमें उन्होंने दुनिया के दो महानतम उपन्यासों की रचना की:
वॉर एंड पीस (War and Peace): जो 1865 से 1869 के बीच लिखा गया और यह उनके अपने सैन्य अनुभवों पर आधारित था।
अन्ना कारेनिना (Anna Karenina): जो 1875 से 1877 के बीच लिखा गया।
1876 के बाद टॉल्स्टॉय गंभीर आंतरिक और आध्यात्मिक संकट से गुज़रे। उन्होंने रूसी रूढ़िवादी चर्च के जड़ और सामंती विचारों को खारिज करते हुए 'ईसाई धर्म के पुनर्जागरण' का अपना एक नया दर्शन विकसित किया, जिसका विवरण उन्होंने अपनी उत्कृष्ट पुस्तक "ए कन्फेशन" (A Confession) में लिखा।
उन्होंने निजी संपत्ति की अवधारणा को खारिज कर दिया, इंसान द्वारा इंसान के शोषण की कड़े शब्दों में निंदा की और अपनी लेखनी व वाणी से लोकतंत्र, समानता, बंधुत्व और अहिंसा को अपना जीवन-सिद्धांत घोषित किया। उनके इन विचारों ने आगे चलकर महात्मा गांधी जैसी महान हस्तियों को प्रभावित किया।
रूस की जनता और दुनिया भर में टॉल्स्टॉय का प्रभाव इस हद तक बढ़ चुका था कि रूसी सरकार उनके क्रांतिकारी विचारों के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने का साहस नहीं कर सकी, हालांकि रूढ़िवादी रूसी चर्च ने 1901 में उन्हें ईसाई धर्म से निष्कासित कर दिया था।
वे अपने सिद्धांतों के अनुसार एक साधारण जीवन जीना चाहते थे, लेकिन उनके परिवार के सदस्य (विशेषकर उनकी पत्नी) उनकी इस फकीरी व दरवेशी के खिलाफ थे। नतीजतन, दुखी होकर उन्होंने बुढ़ापे में अपना घर छोड़ दिया, अपनी सारी संपत्ति व जागीर किसानों और मजदूरों में बांट दी और बदन के दो कपड़ों के अलावा सब कुछ त्याग दिया।
टॉल्स्टॉय केवल एक उपन्यासकार ही नहीं बल्कि एक नाटककार, निबंधकार, समाज सुधारक और दार्शनिक भी थे। उनकी अन्य प्रमुख रचनाओं में "पुनरुत्थान" (Resurrection), "इवान इलिच की मौत" (The Death of Ivan Ilyich), "द क्रुटज़र सोनाटा" (The Kreutzer Sonata) और कई नैतिक व सामाजिक निबंध शामिल हैं।
निधन: 20 नवंबर 1910 को रूस के एक सुदूर रेलवे स्टेशन (अस्तापोवो) के प्लेटफॉर्म पर अत्यंत दयनीय (कसमपरसी) स्थिति में इस महान समाज सुधारक और लेखक का निधन हो गया।
सहायक लिंक : | https://en.wikipedia.org/wiki/Leo_Tolstoy
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