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प्रसिद्ध जासूसी उपन्यासकार

प्रसिद्ध जासूसी उपन्यासकार

एम ए राहत का परिचय

उपनाम : 'एम ए राहत'

मूल नाम : Marghoob Ali Rahat

जन्म :कानपुर, उत्तर प्रदेश

निधन : 24 Apr 2017 | लाहौर, पंजाब

LCCN :n82065825

पहचान: उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय फ़िक्शन लेखकों में से एक, सनसनीखेज़ और अलौकिक उपन्यास-लेखन के लिए प्रसिद्ध
मरग़ूब अली राहत, जो साहित्यिक जगत में एम. ए. राहत के नाम से प्रसिद्ध हैं, 1941 में कानपुर में जन्मे। उनके दादा हबीब अली राग़िब तहरीक-ए-पाकिस्तान के सक्रिय कार्यकर्ता थे। प्रारंभिक शिक्षा अलीगढ़ और दिल्ली में प्राप्त की। 1955 में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान हिजरत कर के कराची आ गए, जहाँ बाद में कराची विश्वविद्यालय से एम.ए. उर्दू किया।

उनका साहित्यिक सफ़र 1960 के दशक में शुरू हुआ। कराची में दो वर्ष निजी नौकरी करने के बाद उन्होंने मशहूर इमरान सीरीज़ और इब्ने सफ़ी की सृजित जासूसी दुनिया फ़रीदी-हमीद सीरीज़ के लिए लिखना शुरू किया। आरंभ में एक प्रकाशक ने उनकी रचना प्रकाशित करने से इंकार कर दिया, किंतु दूसरे प्रकाशक ने उसे स्वीकार कर प्रकाशित किया और यहीं से उनकी असाधारण लोकप्रियता का आरंभ हुआ। बाद में उनकी सफलता के परिणामस्वरूप इमरान डाइजेस्ट तथा अनेक सस्पेंस और जासूसी डाइजेस्ट अस्तित्व में आए।

एम. ए. राहत ने अपराध, जासूसी, सामाजिक, रोमानी, ऐतिहासिक, विज्ञान-कल्पना और अलौकिक विषयों पर अनेक उपन्यास लिखे। उनका नाम इब्ने सफ़ी, ए. हमीद और मुहीउद्दीन नवाब के बाद उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय कमर्शियल फ़िक्शन लेखकों में लिया जाता है, बल्कि अनेक आलोचक उन्हें इस परंपरा की अंतिम बड़ी कड़ी मानते हैं।

उनकी सबसे प्रमुख पहचान उनके अलौकिक और रहस्यपूर्ण उपन्यास हैं, जिनमें उन्होंने जिन्नात, जादू, प्रेत-बाधा, रहस्यमय जीवों और अदृश्य संसार को ऐसी कुशलता से प्रस्तुत किया कि यही शैली उनकी विशिष्ट पहचान बन गई। उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में सदियों का बेटा, कालका देवी, जिन ज़ादा, संदल का ताबूत, ब्लडी मैरी, काला जादू, जिन्नाती दुनिया, नमरूद का शहर आदि शामिल हैं।

उपन्यास-लेखन के अतिरिक्त उन्होंने टेलीविज़न के लिए भी लेखन किया। 1994 में काज़िम पाशा के अनुरोध पर उन्होंने प्रसिद्ध धारावाहिक इक़रार/एतराफ़ लिखा, जबकि कैप्टन प्रमोद भी उनकी लोकप्रिय नाट्य रचनाओं में गिना जाता है।

एम. ए. राहत लंबे समय तक विभिन्न अख़बारों और पत्रिकाओं से जुड़े रहे और जीवन के अंतिम दौर में फ़ैमिली मैगज़ीन नवाए वक़्त के लिए निरंतर लिखते रहे, जहाँ उनका उपन्यास "झरने" प्रकाशित हो रहा था।

निधन: 24 अप्रैल 2017, लाहौर

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