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मन्नू भंडारी की कहानियाँ
त्रिशंकु
तनू एक ऐसे रौशन ख़्याल और माडर्न घराने से ताल्लुक़ रखती है जिसके वालदैन ने लव मैरिज की है और उसकी वालिदा इस लव मैरिज के सिलसिले में नाना की मुख़ालिफ़त और अपने मुकालमों को इतनी बार दोहरा चुकी हैं कि तनू को अज़बर हो गए हैं। पड़ोस में रहने वाले कुछ तालिब-इल्म जब तनू पर फब्तियाँ कसते हैं तो मम्मी उनको अपने घर बुला कर तनू की दोस्ती करा देती हैं लेकिन जब तनू और शेखर के मुआमलात बढ़ने लगते हैं तो मम्मी एक दम से नाना बन जाती हैं लेकिन उनका दूसरा पहलू ये भी है कि सख़्ती करने के बाद एक दम नर्म पड़ जाती हैं। शेखर और उनके दोस्त घर आते हैं तो मम्मी पापा इस तरह मिलते हैं जैसे कुछ हुआ ही ना हो। तनू सोचती है कि काश मम्मी सौ फ़ीसद नाना होतीं।
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