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रजब अली बेग सुरूर

1786 - 1869 | लखनऊ, भारत

उन्नीसवीं सदी के प्रमुख कथाकार/अपनी रचना ‘फ़साना-ए-अजाएब’ के लिए प्रसिद्ध

उन्नीसवीं सदी के प्रमुख कथाकार/अपनी रचना ‘फ़साना-ए-अजाएब’ के लिए प्रसिद्ध

रजब अली बेग सुरूर

अशआर 6

अब है दुआ ये अपनी हर शाम हर सहर को

या वो बदन से लिपटे या जान तन से निकले

लाज़िम है सोज़-ए-इश्क़ का शो'ला अयाँ हो

जल बुझिए इस तरह से कि मुतलक़ धुआँ हो

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नादान कह रहे हैं जिसे आफ़्ताब-ए-हश्र

ज़र्रा है उस के रू-ए-दरख़्शाँ के सामने

क्या यही थी शर्त कुछ इंसाफ़ की तुंद-ख़ू

जो भला हो आप से उस से बुराई कीजिए

दम-ए-तकफ़ीन भी गर यार आवे

तो निकलें हाथ बाहर ये कफ़न से

ग़ज़ल 12

पुस्तकें 40

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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