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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

साहिल अहमद

ग़ज़ल 9

नज़्म 7

अशआर 10

बकरी ''में-में'' करती है

बकरा ज़ोर लगाता है

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शेर गुफा से निकलेगा

शोर मचेगा जंगल में

आज कुआँ भी चीख़ उठा है

किसी ने पत्थर मारा होगा

क्यूँ चमक उठती है बिजली बार बार

ऐ सितमगर ले न अंगड़ाई बहुत

किस तसव्वुर के तहत रब्त की मंज़िल में रहा

किस वसीले के तअस्सुर का निगहबान था मैं

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