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शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

1699 - 1783 | दिल्ली, भारत

मुमत़ाज़ तरीन क्लासीकी शाइरों में शुमार, उर्दू के पहले इस्लाह-ए-ज़बान के अलमबरदार, शाइरी में ईहाम-गोई का रंग

मुमत़ाज़ तरीन क्लासीकी शाइरों में शुमार, उर्दू के पहले इस्लाह-ए-ज़बान के अलमबरदार, शाइरी में ईहाम-गोई का रंग

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम के ऑडियो

ग़ज़ल

आब-ए-हयात जा के किसू ने पिया तो क्या

फ़सीह अकमल

इश्क़ नहीं कोई नहंग है यारो

फ़सीह अकमल

इश्क़ में पास-ए-जाँ नहीं है दुरुस्त

फ़सीह अकमल

जिस कूँ पी का ख़याल होता है

फ़सीह अकमल

जी तरसता है यार की ख़ातिर

फ़सीह अकमल

यार निकला है आफ़्ताब की तरह

फ़सीह अकमल

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