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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायरों में विख्यात।

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायरों में विख्यात।

शोएब निज़ाम

ग़ज़ल 23

अशआर 10

ख़ुद से फ़रार इतना आसान भी नहीं है

साए करेंगे पीछा कोई कहीं से निकले

तुझे शनाख़्त नहीं है मिरे लहू की क्या

मैं रोज़ सुब्ह के अख़बार से निकलता हूँ

तुम्हारे ख़्वाब लौटाने पे शर्मिंदा तो हैं लेकिन

कहाँ तक इतने ख़्वाबों की निगहबानी करेंगे हम

इतना नूर कहाँ से लाऊँ तारीकी के इस जंगल में

दो जुगनू ही पास थे अपने जिन को सितारा कर रक्खा है

मियाँ बाज़ार को शर्मिंदा करना क्या ज़रूरी है

कहीं इस दौर में तहज़ीब के ज़ेवर बदलते हैं

पुस्तकें 5

 

वीडियो 14

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ऑडियो 6

अगर सुने तो किसी को यक़ीं नहीं आए

किसी नादीदा शय की चाह में अक्सर बदलते हैं

ख़ुशी में ग़म मिला लेते हैं थोड़ा

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