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तारकेश्वरनाथ श्रीवास्तव

1948 | गोरखपुर, भारत

मोहब्बत, इंसानियत और सांस्कृतिक चेतना के शायर।

मोहब्बत, इंसानियत और सांस्कृतिक चेतना के शायर।

तारकेश्वरनाथ श्रीवास्तव का परिचय

उपनाम : 'वफ़ा गौरखपुरी'

मूल नाम : तारकेश्वरनाथ श्रीवास्तव

जन्म : 01 Jul 1948 | बलिया, उत्तर प्रदेश

मूल नाम: तारकेश्वर नाथ श्रीवास्तव

तख़ल्लुस: वफ़ा गोरखपुरी
जन्म: 1 जुलाई 1948, बलिया (उत्तर प्रदेश)
परिचय: कवि, शिक्षाविद् एवं साहित्यकार

वफ़ा गोरखपुरी समकालीन उर्दू और हिंदी साहित्य के उन प्रतिष्ठित रचनाकारों में हैं जिन्होंने अपनी शायरी और साहित्यिक सेवाओं के माध्यम से व्यापक पहचान बनाई है। उनकी रचनाओं में प्रेम, मानवीय संवेदनाएँ, वफ़ादारी, सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक चेतना और जीवन के विविध अनुभवों का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। सरल भाषा, सहज अभिव्यक्ति और गहरी भावनात्मकता उनकी शायरी की विशेष पहचान है।

एक शिक्षक और साहित्यकार के रूप में वफ़ा गोरखपुरी ने समाज और साहित्य दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकाल तक सेवाएँ देते हुए नई पीढ़ी में साहित्यिक अभिरुचि विकसित करने का कार्य किया। उनकी शायरी परंपरा और आधुनिकता के संतुलित मेल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

उनकी प्रमुख कृतियों में जलते शब्द, बरसात, रात का सूरज, राहें वफ़ा, रंग-ए-शफ़क़, रविश, ललक, क़ैदे-क़फ़स, औरों के गुल, धूप में साया, एहसास-ए-वफ़ा तथा कुल्लियात-ए-वफ़ा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी रचनाएँ उर्दू और हिंदी साहित्य के पाठकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं।

वफ़ा गोरखपुरी की शायरी इंसानियत, मोहब्बत, सांस्कृतिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों की प्रतिनिधि है। उन्हें गोरखपुर की साहित्यिक परंपरा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षरों में गिना जाता है।

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