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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Aasi Ghazipuri's Photo'

आसी ग़ाज़ीपुरी

1834 - 1917 | ग़ाज़ीपुर, भारत

सूफ़ियाना विचारधारा के लोकप्रिय शायर

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ग़ज़ल

इतना तो जानते हैं कि आशिक़ फ़ना हुआ

फ़सीह अकमल

ऐ जुनूँ फिर मिरे सर पर वही शामत आई

फ़सीह अकमल

कलेजा मुँह को आता है शब-ए-फ़ुर्क़त जब आती है

फ़सीह अकमल

तिरे कूचे का रहनुमा चाहता हूँ

फ़सीह अकमल

वहाँ पहुँच के ये कहना सबा सलाम के बाद

फ़सीह अकमल

हिर्स दौलत की न इज़्ज़ ओ जाह की

फ़सीह अकमल

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