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अफ़सर माहपुरी

1918 - 1995 | कराची, पाकिस्तान

अफ़सर माहपुरी

ग़ज़ल 9

अशआर 8

हम कहाँ होंगे जाने इस तमाशा-गाह में

किस तमाशाई से पहले किस तमाशाई के ब'अद

ये इर्तिक़ा-ए-बशर की है कौन सी मंज़िल

कि इस की ज़द में ख़ुदा भी है काएनात भी है

जाने इस क़दर क्यूँ आप दीवाने से डरते हैं

चराग़-ए-अंजुमन हैं और परवाने से डरते हैं

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कहाँ थी मंज़िल-ए-मक़्सूद अपनी क़िस्मत में

किसी की राहगुज़र भी मिली है मुश्किल से

हम तो उस वक़्त समझते हैं कि आती है बहार

दश्त से जब कोई झंकार सी जाती है

पुस्तकें 1

 

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