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Ghulam Mohammad Qasir's Photo'

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

1941 - 1999 | डेरा इस्माइल ख़ान, पाकिस्तान

पाकिस्तान के लोकप्रिय और प्रतिष्ठित शयार

पाकिस्तान के लोकप्रिय और प्रतिष्ठित शयार

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

ग़ज़ल 44

नज़्म 8

अशआर 48

करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम

मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता

तुम यूँ ही नाराज़ हुए हो वर्ना मय-ख़ाने का पता

हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिस के नैन नशीले थे

गलियों की उदासी पूछती है घर का सन्नाटा कहता है

इस शहर का हर रहने वाला क्यूँ दूसरे शहर में रहता है

ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का

कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है

बारूद के बदले हाथों में जाए किताब तो अच्छा हो

काश हमारी आँखों का इक्कीसवाँ ख़्वाब तो अच्छा हो

पुस्तकें 3

 

वीडियो 28

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ऑडियो 15

आफ़ाक़ में फैले हुए मंज़र से निकल कर

किताब-ए-आरज़ू के गुम-शुदा कुछ बाब रक्खे हैं

ख़ामोश थे तुम और बोलता था बस एक सितारा आँखों में

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