मन्नान क़दीर मन्नान के शेर
हालात बदल सकते हैं 'मन्नान' किसी वक़्त
बन जाएँगे अब साहब-ए-दस्तार तमाशा
मैं ख़ुद से झगड़ने में हूँ मसरूफ़ मिरे दोस्त
और देख रहे हैं दर-ओ-दीवार तमाशा
-
टैग : दोस्त
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड