मोहम्मद शहज़ाद द्वारा अनुवाद
ज़मीर की धड़कन
एडगर एलन पो
ये अंग्रेज़ी ज़बान में शाए (The Tell Tale Heart) का तर्जुमा एक नफ़्सियाती कहानी है जिसमें एक शख़्स, एक बूढ़े आदमी को उसकी आँख से नफ़रत की वजह से क़त्ल कर देता है। कहानी में वो अपने आपको पागल नहीं समझता बल्कि इंतिहाई होशियार और हस्सास साबित करने की कोशिश करता है। आख़िर में उसके ज़मीर की आवाज़ उसे पुलिस के सामने एतराफ़-ए-जुर्म पर मजबूर कर देती है।
गु़ब्बारे का धोका
एडगर एलन पो
एडगर एलन पो की कहानी गु़ब्बारे का धोका "The Balloon Hoax" एक मुख़्तसर तंज़िया और तजस्सुसी अफ़साना है, जो एक अख़बारी रिपोर्ट के अंदाज़ में शाए हुआ। पो ने इसे इस क़दर हक़ीक़त-पसंदाना अंदाज़ में लिखा कि बहुत से क़ारेईन ने इसे सच मान लिया। कहानी में एक गु़ब्बारे के ज़रिए बहर-ए-ओक़्यानूस को ग़ैर-मामूली मुख़्तसर वक़्त में उबूर करने का दावा किया जाता है, लेकिन आख़िर-कार मालूम होता है कि ये पूरी ख़बर एक अदबी फ़रेब थी। इस अफ़साने में पो ने सन्सनी-ख़ेज़ सहाफ़त, साइंसी हैरत और इंसानी सादा-लौही पर निहायत दिलचस्प अंदाज़ में तंज़ किया है, और ये दिखाया है कि मुस्तनद लहजे में लिखी गई झूठी ख़बर भी लोगों को आसानी से यक़ीन दिला सकती है।
शराब का फंदा!
एडगर एलन पो
ये एडगर एलन पो की कहानी "The Cask of Amontillado" का उर्दू तर्जुमा है, जिसमें एक आदमी अपने दोस्त को लालच दे कर तहख़ाने में ले जाता है और वहाँ उसे दीवार में ज़िंदा बंद कर देता है ताकि उस से मुकम्मल और ख़ामोश इंतिक़ाम ले सके।
पाताल और झूलती तलवार
एडगर एलन पो
ये कहानी 'The Pit and the Pendulum' का उर्दू तर्जुमा है। इसमें एक क़ैदी अंधेरी कोठड़ी में मौत के साय तले पड़ा है, जहाँ झूलती हुई फ़ौलादी धार आहिस्ता-आहिस्ता उसके दिल की तरफ बढ़ रही है। हर लम्हा ख़ौफ़, बे-बसी और अज़ियत में गुज़रता है, मगर उम्मीद की आख़री किरण उसे ज़िंदा रखती है। जब दीवारें सुकड़ कर उसे पाताल की तरफ़ धकेलने लगती हैं तो उसे यक़ीन हो जाता है कि अब कोई नजात नहीं। मौत के आख़री लम्हे में अचानक मदद का हाथ बढ़ता है और वह जहन्नम जैसे अज़ाब से बच निकलता है।
आख़री मुलाक़ात
एडगर एलन पो
ये कहानी मशहूर मुसन्निफ़ (लेखक) एडगर एलन पो की 'The Assignation' का उर्दू तर्जुमा (अनुवाद) है, जो वेनिस के खू़बसूरत पस-मंज़र (पृष्ठभूमि) में मोहब्बत, हुस्न और मौत की एक गहरी अलमिया दास्तान (दुखांत कहानी) बयान करती है। कहानी एक ऐसे दौलतमंद, आर्ट के दिल-दादा (प्रेमी) नौजवान रईस और एक मुअज़्ज़ज़ (प्रतिष्ठित) ख़ातून (महिला) के गिर्द घूमती है जो मुआशिरती (सामाजिक) बंदिशों और रस्म-ओ-रिवाज की वजह से एक नहीं हो पाते। अपनी अधूरी मगर कामिल (पूर्ण) मोहब्बत को ला-फ़ानी (अमर) बनाने के लिए, वो दोनों दुनियावी बंधनों को तोड़ कर ख़ामोशी से मौत को गले लगा लेते हैं।
एक रात!
वसेवोलोड मिखाइलोविच गार्शिन
माशहूर रूसी अफ़साना-निगार गारशिन की ये शाहकार कहानी अस्ल रूसी ज़बान में "(Noch) Ночь" और अंग्रेज़ी में "A Night" के नाम से शाए हुई। ये उसी का उर्दू तर्जुमा है, जिसकी बदौलत आप कहानी की हक़ीक़ी रूही कैफ़ियात और असर को बेहतर तौर पर महसूस कर सकेंगे। मुख़्तसर ये कि इस कहानी में एक ऐसे इंसान की दाख़िली कश्मकश की तस्वीर है जो अपनी ज़िंदगी की नाकामियों, पछतावों और तन्हाई से तंग आ कर खुदकुशी का फ़ैसला कर लेता है। एक तवील रात में वो अपने माज़ी, अपनी ज़ात और ज़िंदगी के मकसद पर ग़ौर करता है। गारशिन ने इस कहानी में इंसान के अंदर जारी उम्मीद और मायूसी की जंग, खु़द-ग़रज़ी, मुहब्बत और नजात की ख़्वाहिश को निहायत गहराई से पेश किया है। ये महज़ खुदकुशी की कहानी नहीं बल्कि उस लम्हे की दास्तान है जब इंसान अपनी ज़ात से निकल कर ज़िंदगी का अस्ल मफ़हूम तलाश करने की कोशिश करता है।
“अजीब-ओ-ग़रीब” के फ़रिश्ते का रंगीन तमाशा
एडगर एलन पो
अंग्रेज़ी ज़बान में शाया 'The Angel of the Odd - An Extravaganza' एडगर एलन पो की ये कहानी एक मग़रूर शख़्स की है जो ज़िन्दगी के अजीब-ओ-ग़रीब हादसात को झूठ समझ कर उनका मज़ाक़ उड़ाता है। एक दिन उसके सामने बोतलों और पीपों से बना “अजीब-ओ-ग़रीब का फ़रिश्ता” नमूदार हो कर उसे चैलेंज करता है।
ख़ून का झंडा
वसेवोलोड मिखाइलोविच गार्शिन
सेमन इवानोफ़ रेलवे में पटड़ियों की निगरानी पर मामूर था। उसकी चौकी एक स्टेशन से बारह वरस्त, यानी लगभग आठ मील, और दूसरे से दस वरस्त के फ़ासले पर थी। एक साल पहले वहाँ से कोई चार वरस्त दूर कपड़ा बुनने की एक बड़ी मिल क़ायम हुई थी। जंगल के दरख़्तों के पीछे से उसकी
बीरनीस की कहानी
एडगर एलन पो
बीरनीस "Berenice – A Tale" अमरीकी अदीब एडगर एलन पो की एक मशहूर ख़ौफ़नाक कहानी है, जो पहली बार 1835 में शाए हुई। ये कहानी एक ऐसे शख़्स की ज़ेहनी ज़वाल की दास्तान है जो बीमारी, तन्हाई और ग़ैर-मामूली ख़यालात का शिकार हो कर हक़ीक़त और वहम के दरमियान फ़र्क़ खो देता है। कहानी का रावी अपनी चचा-ज़ाद बीरनीस की बीमारी और बदलती हुई शख़्सियत को देखते हुए एक अजीब जुनून में मुब्तला हो जाता है, जिसका मरकज़ उसके दाँत बन जाते हैं। ये कहानी ख़ौफ के साथ-साथ इंसानी ज़ेहन की पेचीदगी, बीमार तख़य्युल और जुनून की तबाह-कुन ताक़त का गहरा मुताला भी पेश करती है।
बौना मस्ख़रा
एडगर एलन पो
ये एडगर एलन पो की एक मशहूर अलामती और इंतिकामी कहानी है, जो अंग्रेज़ी ज़बाम में Hop Frog के नाम से शाए हुई है। ये कहानी एक ऐसे बौने मसख़रे की ज़िंदगी के गिर्द घूमती है जिसे एक ज़ालिम बादशाह अपने दरबार में महज़ तफ़रीह का ज़रिया समझता है। हाप फ़्रॉग जिस्मानी कमजोरी के बावजूद ज़हानत, बर्दाश्त और ग़ैर-मामूली सलाहियतों का मालिक है, मगर बादशाह के मुसल्सल ज़ुल्म और तज़हीक के बाद उसके अंदर इंतिकाम का जज़्बा पैदा होता है। कहानी में एडगर एलन पो ने ताक़त के ग़रूर, इंसान की तज़हील, तबक़ाती ज़ुल्म और बदले की नफ़्सियात को निहायत मुअस्सिर अंदाज़ में पेश किया है। हाप फ़्रॉग का किरदार बज़ाहिर एक कमज़ोर और मज़्हाका-ख़ेज़ शख़्स नज़र आता है, लेकिन आख़िर में वो अपनी अक़्ल और मंसूबा-बंदी से ज़ालिम हुकमुरानों को शिकस्त देता है। ये कहानी इस बात की अलामत भी है कि मुसल्सल ज़ुल्म सहने वाला इंसान कभी-कभी अपनी ख़ामोशी के पीछे एक ताक़तवर रद्द-ए-अमल छुपा सकता है। हाप फ़्रॉग ख़ौफ़, तंज़, अलमिया और इंतिकाम का हसीन इम्तिज़ाज है। एडगर एलन पो ने इस मुख़्तसर कहानी में दिखाया है कि मज़ाक़ और ज़ुल्म के दरमियान एक बारीक लकीर होती है, और जो लोग दूसरों की तज़हील को तफ़रीह समझते हैं, वो कभी-कभी अपने ही अंजाम का सबब बन जाते हैं।
रु मोर्ग के क़त्ल
एडगर एलन पो
ये कहानी एडगर एलन पो (Edgar Allan Poe) की मशहूर-तरीन जासूसी कहानी "The Murders in the Rue Morgue" (जिसका उर्दू तर्जुमा इस दस्तावेज़ में है) का एक इक़्तेबास ज़ाहिर होती है। इस कहानी में रावी अपने दोस्त (दूपन) की अनोखी और अजीब आदतों का ज़िक्र करता है, जो एक बहीमाना और पुर-असरार क़त्ल की वारदात का तज्ज़िया करते हुए पुलिस की ना-अहली पर बात करता है। दूपन का मानना है कि अख़बारात और पुलिस इस उलझे हुए मामले को सही तरह नहीं समझ रहे और जिन ग़ैर-मामूली अलामात की वजह से पुलिस इसे ना-क़ाबिल-ए-हल मुअम्मा समझ रही है, दर-अस्ल वही अलामात इस केस को हल करना आसान बनाती हैं। पुलिस इस बात पर हैरान है कि जाए-वुक़ूअ पर सिर्फ़ मक़तूल लड़की की लाश और एक बूढ़ी औरत का बिगाड़ा हुआ जिस्म मिला, जबकि कमरे में किसी के दाख़िल होने या फ़रार होने का कोई वाज़ेह रास्ता नहीं था और दो मर्दों की पुर-असरार आवाज़ें सुनाई दी थीं, दूपन के मुताबिक़ पुलिस ने एक आम सी ग़लती कर के इस पुर-असरार हक़ीक़त को ख़ुद ही पेचीदा बना दिया।
चार दिन!
वसेवोलोड मिखाइलोविच गार्शिन
ये कहानी व्यूवोलोड गारशन के अफ़साने "Four Days" का उर्दू तर्जुमा है, जो एक ज़ख्मी सिपाही की कहानी है, जो मैदान-ए-जंग में चार दिन तक मौत के इंतिज़ार में पड़ा रहता है। अपने ज़ख्मों, प्यास और तन्हाई के दौरान वो जंग, क़त्ल और इंसानियत के बारे में गहरी सोच में मुब्तिला हो जाता है। ये अफ़साना जंग की बहादुरी के पर्दे के पीछे छुपी इंसानी अज़ियत और अलमिये को बे-नक़ाब करता है।
लैंडर का झोंपड़ा
एडगर एलन पो
ये एडगर एलन पो की एक ख़ूबसूरत और ख़याल-अंगेज़ कहानी 'Landor’s Cottage' है, जिसमें फ़ितरत, हुस्न और फ़नकारी के इम्तिज़ाज को पेश किया गया है। कहानी का रावी एक ऐसी पुर-असरार वादी में पहुँचता है जहाँ हर चीज़ ग़ैर-मामूली तरतीब और दिल-कशी का नमूना है। वादी में मौजूद छोटी सी कुटिया अपनी सादगी के बावजूद एक ख़वाब-नाक और जन्नत-नुमा मंज़र पेश करती है। ये कहानी पो की बेहतरीन मंज़र-निगारी और हुस्न-ए-तख़य्युल की उम्दा मिसाल है।
कोच-वान का क़दम!
वसेवोलोड मिखाइलोविच गार्शिन
गारशिन का ये अफ़्साना रूसी ज़बान में "То, чего не было (To, chego ne bylo)" नाम से शाए हुआ, जिसका अंग्रेज़ी तर्जुमा मुतअद्दिद उन्वान ("That Which Was Not", "Make-Believe", "What Was Not") से शाए हुआ। इस कहानी में इंसानी ज़िंदगी के बारे में उनके महदूद और मुतज़ाद फ़लसफ़ों का एक तंज़िया तज्ज़िया है। हर किरदार अपने महदूद तजरुबे को ही पूरी सच्चाई समझता है, जबकि क़ुदरत का निज़ाम उन तमाम नज़रियात से बे-नियाज़ हो कर किसी भी लम्हे सब को रौंद सकता है। मुसन्निफ़ इस हक़ीक़त को नुमायाँ करना चाहता है कि इंसान अपनी बे-बसी और नाकामियों को भी बड़े-बड़े जज़्बाती और फ़लसफ़ियाना दावों से छिपाने का आदी है। ज़िंदगी की तमाम-तर बहसें और फ़लसफ़े एक हादसे (कोचवान के क़दम) के आगे दम तोड़ देते हैं, और बाक़ी बच जाने वाले किरदार अपनी मामूली चोटों को भी "अज़ीम क़ुर्बानी" का रंग दे कर झूठ और मुबालग़ा-आराई में पनाह ढूँढ लेते हैं।
काली बिल्ली
एडगर एलन पो
The Black Cat (काली बिल्ली) मशहूर अमरीकी मुसन्निफ़ एडगर एलन पो (Edgar Allan Poe) की तहरीर-कर्दा एक बज़ाहिर घरेलू मगर इंतिहाई ख़ौफ़नाक और सबक़-आमोज़ मुख़़्तसर कहानी है, जो एक ऐसे शख़्स की दास्तान बयान करती है जो शराब-नोशी की मोहलिक आदत के बाइस अख़्लाक़ी ज़वाल का शिकार हो कर अपने ही महबूब पालतू जानवर, एक काली बिल्ली प्लूटो, पर तशद्दुद करता है और बिल-आख़िर उसे दरख़्त से लटका कर मार देता है। इस ज़ालिमाना फ़ेल के फ़ौरन बाद उसका घर आतिश-ज़दगी का शिकार हो कर तबाह हो जाता है और बाद में उसे प्लूटो जैसा ही एक और काला बिल्ला मिलता है जिसकी एक आँख ज़ाया होती है और सीने पर फाँसी के घाट (Gallows) की शक्ल का एक पुर-असरार निशान उभरता है। इस नए बिल्ले की मुसल्सल मौजूदगी, ख़ब्त और ज़मीर की मलामत उसे शदीद पागलपन और ग़ुस्से में मुब्तला कर देती है, जिसके नतीजे में वो तैश में आ कर अपनी बीवी को क़त्ल कर के उसकी लाश को तह-ख़ाने की दीवार में चुन देता है, मगर आख़िरकार उसी बिल्ले की पुर-असरार चीख़ पुलिस को दीवार के पीछे छुपी लाश तक पहुँचा कर क़ातिल को उसके हौलनाक अंजाम तक पहुँचा देती है।
चोरी-शुदा ख़त
एडगर एलन पो
चोरी शुदा ख़त (The Purloined Letter) मशहूर अमरीकी मुसन्निफ़ एडगर एलन पो (Edgar Allan Poe) की तहरीर-कर्दा एक शाहकार जासूसी कहानी है, जिसमें मरकज़ी किरदार सी. आगस्ट दुपेन अपनी ग़ैर-मामूली ज़हानत और गहरी मुशाहिदाती सलाहियत से एक पेचीदा राज़ हल करता है। कहानी में पेरिस की पुलिस एक निहायत अहम ख़त तलाश करने में नाकाम रहती है जिसे एक ताक़तवर वज़ीर ने चुरा लिया होता है। दुपेन इंसानों की उमूमी सोच से हट कर, मुज्रिम की नफ़्सियात, आदतों और सोचने के अंदाज़ को समझते हुए ये मालूम कर लेता है कि ख़त कहाँ छुपाया गया है। वो अपने मंतिक़ी अंदाज़-ए-फ़िक्र और हिकमत-ए-अमली से पुलिस की इस नाकामी को शानदार कामयाबी में बदल देता है। ये कहानी अक़्ल, फ़ह्म, गहरे नफ़्सियाती मुशाहिदे और ज़ेहनी बरतरी की एक बेहतरीन और शानदार मिसाल है।
सुर्ख़ फूल
वसेवोलोड मिखाइलोविच गार्शिन
ये कहानी रूसी मुसन्निफ़ वसेवोलोड गार्शिन (Vsevolod Garshin) के मशहूर अफ़साने 'सुर्ख़ फूल' (The Red Flower) का उर्दू तर्जुमा है। ये एक ऐसे शदीद ज़ेहनी मरीज़ की दास्तान है जिसे पागल-ख़ाने लाया जाता है। मरीज़ ख़ुद को एक अज़ीम आलमी मिशन पर मामूर समझता है जहाँ उसका मक़सद दुनिया से तमाम बुराइयों का ख़ात्मा करना है। हॉस्पिटल के बाग़ में उगे हुए एक शोख़ सुर्ख़ फूल को वो काएनात की तमाम-तर बुराइयों और मन्फ़ी ताक़तों का मरकज़ समझ बैठता है। अपने जुनून में वो उस फूल को तोड़ कर अपने सीने से छुपा लेता है ताकि उसके ज़हर को अपने अन्दर जज़्ब कर के दुनिया को शर से निजात दिला सके। ये कहानी इंसानी नफ़सियात, दीवानगी, और ख़ैर-ओ-शर के दरमियान जारी एक मुबहम मगर दर्दनाक जंग की अक्कासी करती है।
अशर की हवेली का अंजाम!
एडगर एलन पो
ये कहानी अंग्रेज़ी ज़बान में 'The Fall of the House of Usher' के नाम से मौजूद है। जिस में एक रावी है जो अपने दोस्त रॉडरिक की दावत पर उसकी पुरानी और वीरान हवेली पहुँचता है। वहाँ रॉडरिक और उसकी जुड़वाँ बहन मैडलिन पुर-असरार बीमारियों में मुब्तला मिलते हैं। कुछ दिन बाद मैडलिन ब-ज़ाहिर मर जाती है, लेकिन तद्फ़ीन के बाद वो अचानक ज़िंदा वापस आ जाती है। इस ख़ौफ़नाक मंज़र को देख कर रॉडरिक सदमे से मर जाता है और हवेली ज़मीन-बोस हो जाती है।
ज़िंदा तस्वीर!
एडगर एलन पो
ये 'एडगर एलन पो' की अंग्रेज़ी में शाए 'The Oval Portrait' कहानी का उर्दू तर्जुमा है, जिसमें एक शदीद ज़ख़्मी शख़्स एक मतरूक महल में रात गुज़ारते हुए एक पुर-असरार बैज़वी तस्वीर देखता है जिसकी ज़िन्दगी जैसी हक़ीक़त उसे हिला देती है।
लीजिया
एडगर एलन पो
लीजिआ (Ligeia) एडगर एलन पो (Edgar Allan Poe) का एक शाहकार नफ़्सियाती और गोथिक अफ़साना है, जिसमें मोहब्बत, मौत, याद-दाश्त और इंसानी इरादे की पुर-असरार क़ुव्वत को निहायत फ़न-काराना अंदाज़ में पेश किया गया है। कहानी का रावी अपनी ग़ैर-मामूली ज़हानात और दिलकश शख़्सियत की मालिक बीवी लीजिआ की मौत के बाद भी उसकी याद से आज़ाद नहीं हो पाता। दूसरी शादी के बावजूद वो माज़ी के सहर में गिरफ़्तार रहता है, यहाँ तक कि हक़ीक़त और वहम की सरहदें धुंधला जाती हैं। अफ़साने का इख़्तिताम ऐसा पुर-असरार और मुब्हम है कि क़ारी को आख़िर तक ये फ़ैसला करने में दुश्वारी होती है कि वो किसी मा-फ़ौक़-उल-फ़ितरत वाक़ेए का मुशाहिदा कर रहा है या एक शिकस्ता ज़ेहन की कैफ़ियत का। लीजिआ को एडगर एलन पो की बेहतरीन तख़्लीक़ात में शुमार किया जाता है और इसे गोथिक अदब और नफ़्सियाती अफ़साने का एक ला-ज़वाल नमूना समझा जाता है।
मैरी रोज़े का राज़ - रू मोर्ग के क़त्ल का तसलसुल
एडगर एलन पो
ये कहानी Edgar Allan Poe की मशहूर-तारीन जासूसी कहानी "The Murders in the Rue Morgue" का तसलसुल है। ये कहानी मशहूर जासूस किरदार C Auguste Dupin की एक ऐसी तहक़ीक़ात पर मब्नी है जिसमें वो एक नौजवान लड़की Marie Roget के पुर-असरार क़त्ल का सुराग़ लगाने की कोशिश करता है। Dupin रिवायती अंदाज़-ए-तफ़्तीश के बजाए बारीक मुशाहेदे, मंतिक़ी तज्ज़िये और छोटे-छोटे वाक़ियात से नताएज अख़्ज़ करता है। वो पुलिस के अंदाज़-ए-फ़िक्र को रद्द करते हुए साबित करता है कि ब-ज़ाहिर वाज़ेह दिखाई देने वाले शवाहिद भी ग़लत सिम्त ले जा सकते हैं। कहानी में जुर्म से ज़ियादा अक़्ल, इस्तिदलाल और इंसानी नफ़्सियात की पेचीदा गुत्थियों पर तवज्जो दी गई है। Edgar Allan Poe की ये तहरीर जदीद जासूसी अदब की बुनियाद रखने वाली अहम कहानियों में शुमार होती है। दिलचस्प बात ये है कि ये कहानी एक हक़ीक़ी क़त्ल के वाक़ेए से मुतअस्सिर थी। Marie Cecilia Rogers का क़त्ल 1841 AD. में New York में पेश आया था, लेकिन इस अस्ल वाक़ेए में भी क़ातिल की शनाख़्त यक़ीनी तौर पर साबित नहीं हो सकी। Edgar Allan Poe ने इसी पुर-असरार वाक़ेए को अपनी तख़्लीक़ी सलाहीयत और मंतिक़ी तज्ज़िये के ज़ारिए एक अदबी शक्ल दी और इसे "Marie Roget Ka Raaz" के उनवान से पेश किया।
एक मुख़्तसर दासतान-ए-मोहब्बत
वसेवोलोड मिखाइलोविच गार्शिन
ये कहानी मारूफ़ रूसी मुसन्निफ़ वीसी वोलूद गार्शिन (Vsevolod Garshin) की क़लमी तख़्लीक़ है। रूसी ज़बान में ये "Очень коротенький роман" (ओचन कोरोटेंकी रोमन) के अनवान से मारूफ़ है, जबकि अंग्रेज़ी में "A Very Short Romance" के नाम से शाये हुई। ये इसका उर्दू तर्जुमा है। ये अफ़साना मोहब्बत, ईसार और महरूमी की एक निहायत दर्दनाक दास्तान है। इसमें एक नौजवान सिपाही अपनी महबूबा माशा की आरज़ू पर मैदान-ए-जंग का रुख़ करता है और वतन की ख़ातिर बहादुरी से लड़ते हुए अपना एक पैर गंवा बैठता है। जब वो लौटता है तो उसे मालूम होता है कि माशा किसी और से रिश्ता-ए-इज़दिवाज में मुंसलिक हो रही है, मगर वो उसकी मसर्रत की ख़ातिर ख़ामोशी से खुद को उसकी ज़िंदगी से अलग कर लेता है। गार्शिन ने इस अफ़साने में जंग के जिस्मानी और रूहानी ज़ख़्मों को बड़ी गहराई से क़लमबंद किया है। मुख़्तसर होने के बावजूद ये कहानी इंसानी मोहब्बत, क़ुर्बानी और तन्हाई के शदीद एहसास को निहायत मोअस्सिर अंदाज़ में उजागर करती है।