नाजी शाकिर
ऑडियो 7
कमर की बात सुनते हैं ये कुछ पाई नहीं जाती
ज़िक्र हर सुब्ह ओ शाम है तेरा
तेरे भाई को चाहा अब तेरी करता हूँ पा-बोसी
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