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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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नोमान बद्र के शेर

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ग़ोल के ग़ोल मिरे सहन में बैठते हैं

ये परिंदे मुझे हिजरत नहीं करने देते

मैं काटा जाऊँगा सब को 'अज़ीज़ होते हुए

सड़क के बीच में आया हुआ दरख़्त हूँ मैं

तुम्हारे साथ इक दुनिया खड़ी है

हमारे साथ तो हम भी नहीं हैं

हमारे बा'द भी तुम क़हक़हे लगाते हो

तुम्हारे बा'द तो हम बात भी नहीं करते

हम को ख़ुशियाँ भी उदासी के लिफ़ाफ़े में मिलीं

हम सा बद-बख़्त ज़माने में नहीं है कोई

मुझ पे खुलता कभी लफ़्ज़-ए-मोहब्बत मैं ने

माँ को देखा तो समझ आई मोहब्बत क्या है

मैं कि महरूम था आवाज़ की रा'नाई से

तुम जो आए हो तो एहसास भी सुन सकता हूँ

ज़ेब देता है उसे इतना तग़ाफ़ुल मुझ से

वो कहीं और भी मसरूफ़-ए-वफ़ा है शायद

लफ़्ज़-ए-एहसास को तस्वीर नहीं कर सकते

'इश्क़ दुनिया की ज़बानों से बड़ा है शायद

ये लम्हा जिस में हम आज छुप कर गले मिले हैं

अगर मुक़द्दर नहीं मिला तो सज़ा बनेगा

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