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Nusrat Mehdi's Photo'

नुसरत मेहदी

1970 | भोपाल, भारत

स्त्रीवादी संवेदना को इज़हार देने वाली शायरा

स्त्रीवादी संवेदना को इज़हार देने वाली शायरा

नुसरत मेहदी

ग़ज़ल 28

नज़्म 2

 

अशआर 7

आजिज़ी आज है मुमकिन है हो कल मुझ में

इस तरह ऐब निकालो मुसलसल मुझ में

फ़ज़ा ये अम्न-ओ-अमाँ की सदा रखें क़ाएम

सुनो ये फ़र्ज़ तुम्हारा भी है हमारा भी

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आज इस अंदाज़ से तुम ने मुझे आवाज़ दी

यक-ब-यक मुझ में ख़याल आया कि हाँ मैं भी तो हूँ

आप शायद भूल बैठे हैं यहाँ मैं भी तो हूँ

इस ज़मीं और आसमाँ के दरमियाँ मैं भी तो हूँ

बुलंदी पर मैं जब पहुँचूँगी 'नुसरत'

मिरे दुश्मन मिरे अहबाब होंगे

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वीडियो 38

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

नुसरत मेहदी

आप शायद भूल बैठे हैं यहाँ मैं भी तो हूँ

नुसरत मेहदी

इश्क़ में मजनूँ-ओ-फ़रहाद नहीं होने के

नुसरत मेहदी

इश्क़ में मजनूँ-ओ-फ़रहाद नहीं होने के

नुसरत मेहदी

कतरा के ज़िंदगी से गुज़र जाऊँ क्या करूँ

नुसरत मेहदी

जो मुश्किल रास्ते हैं उन को यूँ हमवार करना है

नुसरत मेहदी

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