रियाज़ तौहीदी का परिचय
पहचान: कहानी-कार और आलोचक
रियाज़ तौहीदी कश्मीरी (मूल नाम: रियाज़ अहमद बट) का जन्म 1 दिसंबर 1973 को जम्मू-कश्मीर के ज़िला कुपवाड़ा के राजवार, वज़रीपोरा (तहसील हंदवाड़ा) में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गवर्नमेंट हाई स्कूल वज़रीपोरा तथा बारहवीं तक की शिक्षा गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल हंदवाड़ा से प्राप्त की। इसके बाद गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, हंदवाड़ा से बी.ए. किया और कश्मीर विश्वविद्यालय से 2001 में उर्दू में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। इसी विश्वविद्यालय के इक़बाल इंस्टीट्यूट से 2004 में इक़बालियत में एम.फिल. तथा 2007 में पीएच.डी. की डिग्री हासिल की।
रियाज़ तौहीदी का नाम जम्मू-कश्मीर की समकालीन उर्दू साहित्यिक हस्तियों में प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने कथा-साहित्य, आलोचना और इक़बालियत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनकी रचनाओं में मानवीय मनोविज्ञान, सामाजिक यथार्थ, सांस्कृतिक विविधता तथा नैतिक एवं वैचारिक प्रश्नों की गहरी समझ दिखाई देती है, जिसने उन्हें साहित्यिक जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
उनकी नियमित साहित्यिक यात्रा का आरंभ 2002 में "डॉक्टर ख़लीफ़ा अब्दुल हकीम बहैसियत इक़बाल-शनास" शीर्षक लेख से हुआ, जो उर्दू अकादमी, दिल्ली की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका "ऐवान-ए-उर्दू" में प्रकाशित हुआ। इसके बाद उनके अनेक लेख और कहानियाँ विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं। उनकी प्रमुख कृतियों में कहानी-संग्रह "काले देवों का साया", आलोचनात्मक पुस्तक "मुआसिर उर्दू अफ़साना: तफ़हीम व तजज़िया", तथा "जहान-ए-फ़साना" और "जहान-ए-इक़बाल" शामिल हैं। कथा-साहित्य, कथा-आलोचना और इक़बालियत के क्षेत्र में उनकी सेवाओं को साहित्यिक एवं अकादमिक जगत में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।