शौकत सिद्दीक़ी का परिचय
पहचान:प्रख्यात उपन्यासकार, कहानीकार, प्रगतिशील साहित्यकार और पत्रकार
शौकत सिद्दीकी का जन्म 20 मार्च 1923 को लखनऊ में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने जन्मस्थान में प्राप्त की। 1944 में बी.ए. की डिग्री हासिल की और बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान (Political Science) में एम.ए. किया। भारत के विभाजन के बाद 1950 में वे पाकिस्तान चले गए। प्रारंभ में उन्होंने लाहौर में निवास किया, किंतु शीघ्र ही कराची को अपना स्थायी निवास बना लिया। पाकिस्तान में उनके शुरुआती दिन आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक विरोध से भरे हुए थे, जिन पर उन्होंने शीघ्र ही विजय प्राप्त कर ली।
वे प्रगतिशील लेखक संघ तथा पाकिस्तान राइटर्स गिल्ड के सक्रिय सदस्य रहे और उपमहाद्वीप में प्रगतिशील साहित्यिक आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत 1944 में लखनऊ से प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘तरकश’ से की। बाद में कराची के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी समाचारपत्र Times, Pakistan Standard और Morning News के न्यूज़ डेस्क पर कार्य किया। अपनी लगन और मेहनत के बल पर वे आगे चलकर उर्दू के प्रतिष्ठित समाचारपत्रों रोज़नामा अंजाम, हफ्तावार अल-फ़तह और रोज़नामा मुसावात के प्रधान संपादक बने। 1984 में उन्होंने पत्रकारिता को अलविदा कह दिया।
शौकत सिद्दीकी ने अपनी रचनाओं में समाजवादी यथार्थवाद (Socialist Realism) की तकनीक का प्रभावशाली उपयोग किया। वे अपने पात्रों को निराशा और निष्क्रियता के अंधकार में नहीं छोड़ते, बल्कि उनमें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने और अपनी नियति स्वयं बदलने का साहस जगाते हैं। विशेष रूप से उन्होंने कराची के वंचित और गरीब वर्ग के जीवन का अत्यंत यथार्थ चित्रण किया। सत्यनिष्ठा और मानवता के भविष्य में अटूट विश्वास उनके साहित्य की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
उनकी पहली कहानी “कौन किसी का” लाहौर के साप्ताहिक ‘ख़य्याम’ में प्रकाशित हुई। 1952 में उनका पहला कहानी-संग्रह “तीसरा आदमी” प्रकाशित हुआ, जिसे अत्यधिक लोकप्रियता मिली। इसके बाद “अंधेरे दूर अंधेरे” (1955), “रातों का शहर” (1956) और “कीमियागर” (1984) प्रकाशित हुए।
उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति “खुदा की बस्ती” (1957) है, जिसे उर्दू साहित्य के क्लासिक उपन्यासों में गिना जाता है। इस पर अनेक सफल धारावाहिक और नाट्य रूपांतरण भी बनाए गए। उनके अन्य प्रमुख उपन्यासों में “कमीनगाह” (1956), “जंगलोस” (तीन खंडों में, प्रथम खंड 1978) और “चारदीवारी” (1990) शामिल हैं, जिनमें उनके लखनऊ के बचपन की झलक भी मिलती है।
उनकी साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में उन्हें 2003 में पाकिस्तान का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान “कमाल-ए-फ़न अवार्ड” (लाइफ़टाइम अचीवमेंट) प्रदान किया गया, जबकि 1960 में उन्हें “आदमजी साहित्य पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया।
निधन: शौकत सिद्दीकी का निधन 18 दिसंबर 2006 को 83 वर्ष की आयु में कराची में हृदयाघात के कारण हुआ।
सहायक लिंक : | https://en.wikipedia.org/wiki/Shaukat_Siddiqui