Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Shorish kashmiri's Photo'

शोरिश काश्मीरी

1917 - 1975 | लाहौर, पाकिस्तान

अद्वितीय शैली के रचनाकार, बेबाक पत्रकार, क्रांतिकारी वक्ता और कवि

अद्वितीय शैली के रचनाकार, बेबाक पत्रकार, क्रांतिकारी वक्ता और कवि

शोरिश काश्मीरी का परिचय

उपनाम : 'शोरिश'

मूल नाम : अब्दुल करीम

जन्म : 14 Aug 1917 | लाहौर, पंजाब

निधन : 25 Oct 1975 | लाहौर, पंजाब

पहचान: विशिष्ट शैली के साहित्यकार, प्रतिष्ठित पत्रकार, क्रांतिकारी वक्ता, कवि और राजनीतिक नेता

आगा शोरिश कश्मीरी, जिनका मूल नाम अब्दुल करीम था, 14 अगस्त 1917 को लाहौर में जन्मे। उनके पूर्वजों का संबंध कश्मीर से था। उनके परदादा श्रीनगर से हिजरत करके अमृतसर आए, और बाद में उनके दादा ने लाहौर को स्थायी निवास बना लिया।

शोरिश कश्मीरी उपमहाद्वीप के उन विलक्षण प्रतिभाशाली साहित्यकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने पत्रकारिता, वक्तृत्व, राजनीति और साहित्य के क्षेत्रों में असाधारण ख्याति प्राप्त की। अपने जोशीले वक्तृत्व, निर्भीक पत्रकारिता और क्रांतिकारी राजनीतिक चिंतन के कारण वे अपने युग की प्रमुख हस्तियों में شمار होते हैं।

उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा मैट्रिक तक प्राप्त की, किंतु अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता, अध्ययन और व्यक्तिगत परिश्रम के बल पर साहित्यिक एवं बौद्धिक जगत में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया। उनके वैचारिक और राजनीतिक निर्माण में मौलाना ज़फ़र अली ख़ान का विशेष प्रभाव रहा, जिनकी पत्रकारिता शैली उन्होंने अपनाई। उन्होंने सैयद अता उल्लाह शाह बुख़ारी और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद से भी लाभ उठाया।

आगा शोरिश कश्मीरी मजलिस-ए-अहरार-ए-इस्लाम के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए और 1946 में उसके महासचिव चुने गए। यद्यपि वे पाकिस्तान आंदोलन में मुस्लिम लीग के साथ नहीं थे, किंतु पाकिस्तान की स्थापना के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति, लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान-निर्माण और वैचारिक बहसों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1974 के तहरीक-ए-ख़त्म-ए-नुबुव्वत में उनकी भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।

पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी पत्रिका "चट्टान" उर्दू पत्रकारिता के इतिहास में एक साहसी, वैचारिक और प्रभावशाली पत्रिका के रूप में याद की जाती है। उनकी लेखनी में निर्भीकता, व्यंग्य, ऐतिहासिक चेतना और वक्तृत्व की झलक स्पष्ट थी। वक्ता के रूप में उनका शुमार उपमहाद्वीप के महानतम वक्ताओं में होता है और उनके भाषण श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते थे।

उनकी प्रमुख कृतियों में फ़ैज़ान-ए-इक़बाल, चेहरे, क़लमी चेहरे, फ़न-ए-ख़िताबत, तहरीक ख़त्म-ए-नुबुव्वत, उस बाज़ार में, पस-ए-दीवार-ए-ज़िंदाँ, बू-ए-गुल नाला-ए-दिल, दूद-ए-चराग़-ए-महफ़िल (आत्मकथा), अबुल कलाम आज़ाद, मौलाना ज़फ़र अली ख़ान, क़ैद-ए-फ़रंग, दिल्ली चलो, इक़बाल और क़ादियानियत तथा ख़ुत्बात-ए-अहरार शामिल हैं।

अपने राजनीतिक संघर्ष के दौरान उन्होंने लगभग साढ़े बारह वर्ष कारावास की यातनाएँ झेलीं, किंतु अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटे।

निधन: 25 अक्तूबर 1975 को लाहौर में उनका निधन हुआ।

Recitation

बोलिए